मुंबई: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद संस्थान में कथित जातिगत भेदभाव, अकादमिक दबाव और संस्थागत जवाबदेही को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आए एक बयान में IIT बॉम्बे वर्कर्स यूनियन से जुड़े एक व्यक्ति ने साहिल को बेहद प्रतिभाशाली छात्र बताते हुए दावा किया कि वह दूसरे वर्ष में आने के बाद पहले वर्ष के विद्यार्थियों को पढ़ाया करता था।
इस बयान में IIT बॉम्बे की कार्यसंस्कृति और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बयान देने वाले व्यक्ति ने रोहित वेमुला मामले का जिक्र करते हुए कहा कि आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला और आरोप लगाया कि “IIT बॉम्बे तो मौत का कुआं है।” यह वक्ता की टिप्पणी है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘साहिल ब्रिलियंट स्टूडेंट था, जूनियर्स को पढ़ाता था’
X पर साझा किए गए वीडियो में IIT बॉम्बे वर्कर्स यूनियन से जुड़े व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि साहिल पढ़ाई में बेहद अच्छा था। उनके मुताबिक, दूसरे वर्ष में पहुंचने के बाद साहिल पहले वर्ष के विद्यार्थियों को पढ़ाने में भी मदद करता था।
साहिल के परिवार की ओर से भी उसे पढ़ाई में अच्छा और मेहनती बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार ने कहा है कि उसने IIT में दाखिला हासिल करने के लिए काफी मेहनत की थी।
जातिगत भेदभाव के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी मौत से कुछ दिन पहले उन्हें जातिगत टिप्पणियों और कथित उत्पीड़न के बारे में बताया था। परिवार के मुताबिक, उन्होंने उस समय साहिल को ऐसी बातों को नजरअंदाज कर पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी थी और अब उन्हें इसका अफसोस है। इन आरोपों की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है।
दूसरी तरफ IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने संबंधित प्रोफेसर का बचाव करते हुए कहा है कि परीक्षा के दौरान की गई कार्रवाई संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया के तहत थी। फैकल्टी पक्ष ने यह भी कहा है कि साहिल ने हाल के महीनों में संस्थान के SC/ST सेल से कोई शिकायत नहीं की थी।
परीक्षा में मोबाइल के आरोप से शुरू हुआ विवाद
साहिल की मौत वाले दिन वह मिड-सेमेस्टर परीक्षा दे रहा था। IIT बॉम्बे की शुरुआती जानकारी में परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया था। बाद में संस्थान ने इस तरह घटना का विवरण सार्वजनिक करने के लिए माफी मांगते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले घटनाक्रम को इस तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं था।
छात्रों ने भी स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी भी तरह की अकादमिक गड़बड़ी को सही ठहराने के लिए नहीं है। उनका कहना है कि वे संस्थान की व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवाल उठा रहे हैं।
रोहित वेमुला का संदर्भ क्यों आया?
IIT बॉम्बे वर्कर्स यूनियन से जुड़े व्यक्ति के बयान में रोहित वेमुला का भी उल्लेख किया गया। उनका कहना था कि रोहित वेमुला को अब तक न्याय नहीं मिला और साहिल की घटना को भी उसी व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने की जरूरत है।
रोहित वेमुला की मौत और उससे जुड़े जातिगत भेदभाव तथा संस्थागत भेदभाव के आरोपों ने देश में उच्च शिक्षा संस्थानों में दलित विद्यार्थियों की स्थिति को लेकर लंबे समय तक बहस को जन्म दिया था।
साहिल मामले में भी अब यही सवाल दोबारा सामने है कि क्या प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक पृष्ठभूमि और जातिगत पहचान विद्यार्थियों के अनुभवों को प्रभावित कर रही है?
‘IIT मौत का कुआं है’—बयान पर भी उठेंगे सवाल
वीडियो में इस्तेमाल किया गया “IIT बॉम्बे मौत का कुआं है” जैसा बयान बेहद गंभीर टिप्पणी है। इसे फिलहाल संबंधित व्यक्ति की राय/आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। IIT बॉम्बे में पढ़ने वाले सभी छात्रों के अनुभव एक जैसे हैं, ऐसा निष्कर्ष इस एक घटना के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
लेकिन साहिल की मौत, परिवार के जातिगत भेदभाव के आरोप, छात्रों के प्रदर्शन और संस्थान के भीतर चल रही जांच ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या IIT जैसे संस्थानों में छात्रों की शिकायतों, मानसिक दबाव और सामाजिक भेदभाव से निपटने की व्यवस्था पर्याप्त है?
जांच से ही सामने आएगा असली सच
मामले में फिलहाल कई अलग-अलग दावे सामने हैं। साहिल के परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जबकि फैकल्टी की ओर से संबंधित प्रोफेसर का बचाव किया गया है। IIT बॉम्बे ने भी अपनी शुरुआती सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर माफी मांगी है और संस्थान ने घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।
इसलिए अभी किसी एक पक्ष को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना ने जातिगत भेदभाव, संस्थागत जवाबदेही और IIT जैसे संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले दबाव पर गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है।