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शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,248 अंक और निफ्टी 384 अंक टूटा, कच्चे तेल से US बॉन्ड यील्ड तक बने संकट के कई मोर्चे

by Admin
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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव बना रहा और अंत में बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। BSE सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 23,063.10 पर आ गया। यह दोनों प्रमुख सूचकांकों के लिए 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट रही।

गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। Nifty Midcap 100 करीब 2.08 फीसदी और Smallcap 100 करीब 1.53 फीसदी नीचे रहे। यानी बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक था।

आखिर बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

गुरुवार की गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई घरेलू और वैश्विक कारण एक साथ काम करते दिखाई दिए। सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से आया।

1. 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude करीब 105.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

तेल महंगा होने का असर भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। बाजार में यह आशंका भी रहती है कि लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं।

2. ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई चिंता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकने की बात कही, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में भी स्पष्ट प्रगति नहीं दिखी। इस घटनाक्रम ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।

निवेशकों के लिए चिंता सिर्फ तेल की कीमत नहीं है, बल्कि यह भी है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो ऊर्जा कीमतों और वैश्विक महंगाई पर इसका असर कितना बढ़ सकता है।

3. अमेरिका की बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाया दबाव

बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से आया। रिपोर्टों के मुताबिक US 10-year Treasury yield 5.11 फीसदी तक पहुंच गई। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अक्सर वैश्विक निवेशकों को अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकती है और उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा सकती है।

इसके साथ अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों से जुड़े मजबूत आंकड़ों ने भी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

4. बीमा सेक्टर से जुड़ा प्रस्ताव बना घरेलू ट्रिगर

गुरुवार की गिरावट में घरेलू स्तर पर बीमा क्षेत्र के कमीशन और वितरण नियमों में प्रस्तावित बदलाव भी महत्वपूर्ण कारण रहा।

रिपोर्टों के अनुसार बीमा नियामक के प्रस्ताव में कमीशन भुगतान को उत्पाद की जटिलता से जोड़ने और भुगतान को सिर्फ पॉलिसी के शुरुआती साल तक सीमित न रखने जैसी व्यवस्था पर विचार किया गया है। इससे बीमा कारोबार से शुल्क आय हासिल करने वाले बैंक, NBFC और अन्य वित्तीय कंपनियों के संभावित राजस्व पर असर को लेकर बाजार में चिंता पैदा हुई।

इसका असर वित्तीय शेयरों पर साफ दिखाई दिया। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में व्यापक गिरावट दर्ज की गई। PB Fintech में तो गिरावट करीब 36 फीसदी तक पहुंच गई।

5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी दबाव बढ़ा रही

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुख भी चिंता का विषय बना हुआ है। सितंबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 23,676 करोड़ रुपये की निकासी की है। इसके उलट जुलाई और अगस्त में क्रमशः करीब 11,045 करोड़ और 10,231 करोड़ रुपये का निवेश आया था।

ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ी हुई है, विदेशी पूंजी की निकासी भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

6. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में जोरदार बिकवाली

गुरुवार को बाजार की गिरावट में बैंक और वित्तीय कंपनियां प्रमुख रूप से प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक सभी 16 प्रमुख Nifty सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान में बंद हुए, जबकि बैंक और वित्तीय सूचकांकों में लगभग 2 फीसदी से अधिक की गिरावट रही।

इससे बाजार की गिरावट और गहरी हुई, क्योंकि बड़े बैंकिंग और वित्तीय शेयर सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में महत्वपूर्ण वजन रखते हैं।

निवेशकों के लिए आगे क्या अहम होगा?

अब बाजार की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और बीमा नियमों में प्रस्तावित बदलाव पर रहेगी।

कच्चा तेल अगर लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहता है तो भारत के लिए महंगाई और आयात लागत का दबाव महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है। वहीं वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

गुरुवार की गिरावट को इसलिए केवल एक दिन की बिकवाली के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। बाजार में इस समय वैश्विक महंगाई, महंगे तेल, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी पूंजी के प्रवाह से जुड़े कई जोखिम एक साथ दिखाई दे रहे हैं।

बाजार बंद होने पर तस्वीर

  • सेंसेक्स: 73,580.54
  • गिरावट: 1,247.71 अंक, 1.67%
  • निफ्टी: 23,063.10
  • गिरावट: 383.70 अंक, 1.64%
  • Brent crude: करीब 105.6 डॉलर प्रति बैरल
  • मुख्य दबाव: कच्चा तेल, US बॉन्ड यील्ड, पश्चिम एशिया तनाव और वित्तीय शेयरों में बिकवाली
  • विदेशी निवेश: सितंबर में 19 सितंबर तक करीब ₹23,676 करोड़ की निकासी
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