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मायावती का बड़ा ऐलान: BSP में Gen-Z को 50% भागीदारी, आनंद कुमार के बेटों को नहीं मिलेगी राजनीतिक जिम्मेदारी

by Admin
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। मायावती ने कहा है कि पार्टी में नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z युवाओं को करीब 50 प्रतिशत तक संगठनात्मक भागीदारी देने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत आगामी विधानसभा चुनावों में भी सर्वसमाज के कर्मठ और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

मायावती के मुताबिक इसका उद्देश्य नई पीढ़ी के माध्यम से अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के मानवतावादी, समतामूलक और सेक्युलर उद्देश्यों को जमीन पर लागू करने के लिए युवा नेतृत्व को आगे लाना जरूरी है।

Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरतों पर फोकस

BSP प्रमुख ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकारों के दौरान सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ सरकारी नौकरी, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, शहरी और ग्रामीण विकास पर भी काम किया गया।

उन्होंने दावा किया कि BSP सरकारों के कार्यकाल में बड़ी संख्या में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क स्थापित किए गए। मायावती ने इसे नई पीढ़ी यानी Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरतों से जोड़ते हुए कहा कि इन प्रयासों से लोगों का मजबूरी में पलायन भी काफी हद तक रुका।

मायावती ने अपनी चार बार की सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि BSP ने कानून-व्यवस्था, जनहित, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में अपनी सरकार की क्षमता साबित की थी।

2012 के बाद यूपी की राजनीति पर मायावती का हमला

मायावती ने 2012 में BSP के सत्ता से बाहर होने का जिक्र करते हुए इसके लिए विरोधी दलों के कथित जातिवादी रवैये को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि BSP की सरकार पांचवीं बार सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका कथित तौर पर सर्वसमाज के लोगों को आज भी पछतावा है।

उन्होंने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि BSP सरकार के बाद प्रदेश में कानून के राज की स्थिति कमजोर हुई और विकास के सरकारी दावों के बावजूद आम लोगों की समस्याएं बनी हुई हैं।

हालांकि, ये मायावती के राजनीतिक दावे और आकलन हैं, जिन पर सत्ता पक्ष और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

उम्मीदवार चयन में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि BSP का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे, कर्मठ और युवा लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवा उम्मीदवारों में महिला और पुरुष दोनों की भागीदारी होनी चाहिए।

यानी BSP की आगामी चुनावी रणनीति में युवा नेतृत्व और सामाजिक प्रतिनिधित्व को अहम स्थान देने का संकेत इस बयान से मिलता है।

परिवारवाद पर मायावती का सबसे बड़ा संदेश

मायावती के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पार्टी में परिवारवाद को लेकर उनका स्पष्ट रुख है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां को आगे बढ़ाने तथा सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने के मिशन में किसी भी प्रकार की रुकावट उन्हें स्वीकार नहीं है।

मायावती ने दावा किया कि उन्होंने अपने सगे भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखा तथा उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा। उन्होंने कहा कि यह परंपरा उन्होंने मान्यवर कांशीराम की तरह परिवारवाद के विरोध में अपनाई है।

आनंद कुमार के परिवार को लेकर मायावती का बड़ा फैसला

इसी सिलसिले में मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण अपनी सुरक्षा और देखभाल के लिए उन्हें अपने किसी भाई-बहन में से एक को साथ रखने की आवश्यकता पड़ी और अंततः सबसे छोटे भाई आनंद कुमार उनके साथ रहे। मायावती के मुताबिक आनंद कुमार उनकी निगरानी में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां लंबे समय से निभाते रहे हैं।

लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि आनंद कुमार के परिवार के अन्य सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा।

सबसे अहम घोषणा यह रही कि मायावती के अनुसार आनंद कुमार के दोनों बेटों को BSP में किसी छोटे-बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में आनंद कुमार को अपनी मदद के लिए किसी सदस्य की आवश्यकता पड़ती है तो वे अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद, जो फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं, की मदद ले सकते हैं। हालांकि पार्टी में उनकी भूमिका उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखकर तय की जाएगी।

मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि आनंद कुमार अपने बेटों और आगे उनके बच्चों को राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे।

जरूरत पड़ी तो दलित वर्ग के मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी

मायावती ने एक और महत्वपूर्ण विकल्प सामने रखा। उन्होंने कहा कि यदि दीपिका आनंद इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

इस तरह मायावती ने परिवार के बजाय संगठन और मिशन को प्राथमिकता देने का संदेश देने की कोशिश की है।

उनका साफ संकेत है कि किसी व्यक्ति को राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने का अर्थ यह नहीं होगा कि उसके परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए भी पार्टी में राजनीतिक रास्ता खुल जाएगा।

‘अगर लड़की नहीं होती तो भाई को भी साथ नहीं रखती’

मायावती ने अपने बयान में व्यक्तिगत परिस्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि वह महिला नहीं होतीं तो मान्यवर कांशीराम की तरह अपने भाई-बहनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखतीं।

उनके मुताबिक महिला होने के कारण सुरक्षा संबंधी परेशानियों से मुक्त होकर सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा।

लेकिन अब आनंद कुमार के बच्चों के बड़े और शादीशुदा होने के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के बावजूद वह किसी प्रकार के मोह के कारण पार्टी को नुकसान नहीं होने देंगी।

यह हिस्सा मायावती के बयान में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक संगठन के बीच स्पष्ट सीमा खींचने की बात कही है।

सरकार बनने पर भी परिवार के दूसरे सदस्यों को लाभ नहीं?

मायावती ने केवल संगठन तक ही परिवारवाद-विरोधी नीति सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि भविष्य में BSP की सरकार बनती है तो भी किसी व्यक्ति को अवसर मिलने का मतलब उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक लाभ मिलना नहीं होगा।

उनके मुताबिक संगठन और सरकार में संबंधित व्यक्ति को ही जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य सदस्यों को लाभ नहीं दिया जाएगा।

मायावती ने इसे BSP को परिवारवाद से मुक्त रखने और सर्वसमाज के अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक परिवर्तन तथा आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ने के लिए जरूरी बताया।

विरोधियों और ‘पेड प्रोपेगंडा’ से सावधान रहने की अपील

BSP प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोधी पार्टियों, संगठनों तथा जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के कथित “विषैले, साजिशी और प्रायोजित/पेड प्रोपेगंडा” से सावधान रहने को भी कहा।

मायावती ने आरोप लगाया कि BSP को उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने से रोकने के लिए अलग-अलग तरह के राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने अंबेडकरवादी मिशन में पूरे तन-मन-धन से जुटे रहने की अपील की।

यह हिस्सा बताता है कि आगामी चुनावों को लेकर BSP अपने कैडर को राजनीतिक रूप से सक्रिय और संगठित रखने की कोशिश कर रही है।

निष्कासित नेताओं की वापसी पर भी मायावती ने दिया जवाब

बयान के आखिर में मायावती ने सोशल मीडिया पर चल रही एक चर्चा को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह प्रचार किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण BSP से निष्कासित किए गए कुछ लोगों को वापस पार्टी में लिया जा सकता है।

मायावती ने इसे “पूरी तरह गलत और मिथ्या प्रचार” बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों की BSP में वापसी नहीं होगी।

इससे पार्टी के भीतर अनुशासन और पुराने निष्कासित नेताओं की वापसी को लेकर चल रही अटकलों पर मायावती ने फिलहाल विराम लगाने की कोशिश की है।

मायावती के बयान का राजनीतिक मतलब

मायावती का यह बयान केवल संगठनात्मक निर्देश नहीं, बल्कि BSP की आगामी राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा सकता है। एक तरफ वह Gen-Z और युवा चेहरों को संगठन तथा चुनावी राजनीति में अधिक जगह देने की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवारवाद को लेकर बेहद कड़ा संदेश दे रही हैं।

विशेष रूप से आनंद कुमार के बेटों को राजनीतिक जिम्मेदारी से दूर रखने की घोषणा पार्टी के भीतर परिवार की भूमिका को लेकर मायावती की मौजूदा सोच को स्पष्ट करती है।

साथ ही, महिला और युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने, सर्वसमाज के प्रतिनिधित्व पर जोर देने और अंबेडकरवादी राजनीति तथा संवैधानिक मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने की बात से यह संकेत मिलता है कि BSP आगामी चुनावों में पुराने सामाजिक आधार को बनाए रखते हुए नई पीढ़ी को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर जोर देना चाहती है।

अब देखना होगा कि यह घोषणा जमीनी संगठन, उम्मीदवार चयन और आगामी विधानसभा चुनावों में BSP की चुनावी रणनीति में किस रूप में दिखाई देती है।

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