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हापुड़ में दलित युवक की मौत के बाद सियासत गरमाई, पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे राजेंद्र पाल गौतम को पुलिस ने रोका

by Admin
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4 सितंबर को दो पक्षों के बीच हुए विवाद, पथराव और गोलीबारी की घटना में गंभीर रूप से घायल 26 वर्षीय दलित युवक दीपक की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता एवं पूर्व दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया है कि वह अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया

हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के बदनौली गांव में 4 सितंबर को दो पक्षों के बीच हुए विवाद, पथराव और गोलीबारी की घटना में गंभीर रूप से घायल 26 वर्षीय दलित युवक दीपक की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता एवं पूर्व दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया है कि वह अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी।

राजेंद्र पाल गौतम ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने और उनका दुख साझा करने से रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

4 सितंबर की घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था दीपक

गौतम के मुताबिक, बदनौली गांव में 4 सितंबर को दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। देखते ही देखते मामला पथराव और गोलीबारी तक पहुंच गया। इस घटना में 26 वर्षीय दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

दीपक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है और घटना को लेकर इलाके में भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।

राजेंद्र पाल गौतम ने अपने बयान में दीपक को दलित समाज का युवा बताते हुए उसके परिवार के प्रति संवेदना जताई और न्याय की मांग की।

‘पीड़ित परिवार से मिलने से रास्ते में ही रोक दिया’

राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि वह अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार से मुलाकात करने जा रहे थे। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।

गौतम ने सवाल उठाया कि जब कोई जनप्रतिनिधि हिंसा में मारे गए व्यक्ति के परिवार से मिलने और उनका दुख साझा करने जा रहा हो, तो उसे रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पुलिस-प्रशासन का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।

हालांकि, इस संबंध में पुलिस-प्रशासन की ओर से तत्काल क्या कारण बताया गया, इसकी जानकारी गौतम के सोशल मीडिया बयान में नहीं दी गई है।

‘वीडियो कॉल पर परिवार से हुई बातचीत’

पीड़ित परिवार से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो पाने के बावजूद राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि उनकी परिवार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई।

उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान परिवार को हर संभव सहयोग का भरोसा दिया गया है। गौतम ने यह भी कहा कि न्याय की इस लड़ाई में वह पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

उनके मुताबिक, परिस्थितियां सामान्य होने के बाद वह स्वयं बदनौली जाकर परिवार से मुलाकात करेंगे और दीपक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठाएंगे।

पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

इस पूरे मामले में राजेंद्र पाल गौतम ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि किसी घटना के पीड़ित परिवार से मिलना, उसका दुख साझा करना और उसकी न्याय की मांग को उठाना जनप्रतिनिधियों की लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

गौतम ने पुलिस-प्रशासन के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता बताया।

दीपक की मौत के बाद न्याय की मांग तेज

बदनौली की घटना में दीपक की मौत के बाद अब परिवार और स्थानीय स्तर पर न्याय की मांग को लेकर आवाज उठ रही है। इस बीच विपक्षी नेताओं के घटनास्थल या पीड़ित परिवार तक पहुंचने को लेकर भी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट किया है कि वह परिस्थितियां सामान्य होने के बाद परिवार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। साथ ही उन्होंने दीपक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाने का भरोसा दिया है।

अब इस मामले में पुलिस की जांच, घटना के वास्तविक कारण, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मिलने वाली सहायता पर निगाह रहेगी। साथ ही विपक्षी जनप्रतिनिधियों को परिवार से मिलने से रोके जाने के आरोप पर पुलिस-प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

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