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भारी बारिश में भी दिल्ली की सड़कों पर Gen-Z का प्रदर्शन, लगे ‘EVM हटाओ-CEC हटाओ’ के नारे

by Admin
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नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा विवाद अब दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया है। राजधानी में युवाओं और प्रदर्शनकारियों ने भारी बारिश के बीच प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान ‘EVM हटाओ’ और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त हटाओ’ जैसे नारे लगाए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में 25 सितंबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में छात्रों, कार्यकर्ताओं, राजनीतिक नेताओं और नागरिक समूहों की भागीदारी की पुष्टि हुई है। जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा SIR को रोकने की मांग की। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

बारिश के बीच प्रदर्शन, चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ नारे लगाए।

जंतर-मंतर पर हुए एक नागरिक प्रदर्शन में ‘Gyanesh Kumar को हटाओ’ और SIR को तत्काल निलंबित करने जैसे संदेश वाले पोस्टर और बैनर भी दिखाई दिए। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात था और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

SIR विवाद बना प्रदर्शन की बड़ी वजह

इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट भी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे जाने का भी उल्लेख है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि पिछले एक साल में लिए गए उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

दिल्ली में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी

शुक्रवार को दिल्ली में कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, जंतर-मंतर और दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के आसपास प्रदर्शन कर रहे करीब 150 राजनेताओं, छात्र नेताओं और नागरिक समाज से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।

कांग्रेस ने भी दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दिल्ली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की।

Gen-Z की चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती दिलचस्पी

इस पूरे घटनाक्रम में युवाओं की भागीदारी भी चर्चा में है। हाल के महीनों में चुनावी प्रक्रिया, SIR और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर युवाओं के बीच सार्वजनिक बहस और विरोध देखने को मिला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के Gen-Z के साथ संवाद के प्रस्तावित कार्यक्रम भी चर्चा में रहे हैं; मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रमों के टाले जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

प्रदर्शनकारियों की ओर से EVM और चुनाव आयोग को लेकर लगाए जा रहे नारों को उनके राजनीतिक और लोकतांत्रिक असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, EVM की सुरक्षा और संचालन को लेकर निर्वाचन अधिकारियों की ओर से निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल मौजूद हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के अनुसार, इस्तेमाल की गई EVM को स्ट्रॉन्ग रूम में डबल-लॉक व्यवस्था, CCTV और सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखा जाता है तथा उम्मीदवारों/उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में निर्धारित प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।

अब विवाद सिर्फ संसद तक सीमित नहीं

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की मांग, SIR पर विवाद और चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमतियों ने अब राजनीतिक बहस को सड़क तक पहुंचा दिया है। दिल्ली में बारिश के बावजूद हुए प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर विरोध जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद, अदालत और चुनाव आयोग—तीनों स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना रखता है।

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