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भारत-श्रीलंका सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती: केलानिया विश्वविद्यालय में खुलेगा ‘आंबेडकर अध्ययन केंद्र’; सामाजिक विज्ञान संकाय में हुई प्रारंभिक बैठक

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कोलंबो/हैदराबाद: भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और सामयिक कदम उठाया गया है। श्रीलंका के प्रतिष्ठित केलानिया विश्वविद्यालय (University of Kelaniya) के सामाजिक विज्ञान संकाय में एक ‘आंबेडकरअध्ययन केंद्र’ (Ambedkar Study Center) की स्थापना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई। इस विशेष केंद्र का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान के निर्माता, महान समाज सुधारक और आधुनिक बौद्ध धम्म के पुनरुद्धारक डॉ. बी.आर. आंबेडकर के दर्शन, सामाजिक न्याय और उनके मानवतावादी विचारों पर वैज्ञानिक व शैक्षणिक अनुसंधान (Scientific Explorations) को बढ़ावा देना है।

इस विशेष और ऐतिहासिक बैठक का आयोजन श्रीलंका के बौद्ध, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री डॉ. हिनीदुमा सुनील सेनेवी और भारत के तेलंगाना राज्य (हैदराबाद) स्थित ‘आंबेडकर फाउंडेशन’ के प्रतिनिधि श्री लक्ष्मैया मल्लापिल्लई की संयुक्त पहल पर किया गया। बैठक में भारत और श्रीलंका सहित कई विदेशी विद्वानों और शिक्षाविदों का एक बड़ा समूह वैचारिक मंथन के लिए एकत्रित हुआ। इस अवसर पर केलानिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चमिंडा अबेसिंग्हे, प्रो. सरथ विथाराना, कला बोर्ड के अध्यक्ष कीर्ति वेलिसारागे, पुरातत्व विभाग के पूर्व महानिदेशक प्रो. अनुरा मनतुंगा, प्रसिद्ध आंबेडकरवादी विद्वान डॉ. राजा शेखर वुंडरू और प्रख्यात विचारक डॉ. सुनील विजेसिरीवर्धने सहित कई गणमान्य व्यक्ति प्रमुखता से उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान विद्वानों ने सर्वसम्मति से कहा कि वैश्विक स्तर पर पूजनीय और भारतीय शासन प्रणाली के जनक माने जाने वाले डॉ. बी.आर. आंबेडकर का दर्शन आज के समय में बेहद प्रासंगिक है। इस नए अध्ययन केंद्र के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों के उत्थान, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों और बौद्ध धर्म के पुनरुद्धार (Buddhist Rehabilitation) के क्षेत्र में गहन और वैज्ञानिक शोध के विस्तृत द्वार खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र न केवल दोनों देशों के शोधार्थियों को एक साझा अकादमिक मंच प्रदान करेगा, बल्कि भगवान बुद्ध के विचारों की साझी विरासत को साझा करने वाले भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।

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