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बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर के ‘पेपर बम’ की भनक लगते ही BJP ने बदला उम्मीदवार, सियासी गलियारों में चर्चा तेज

by Admin
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पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने घोषित उम्मीदवार अभिषेक बंटी का नाम वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया। इस फैसले के पीछे जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से उम्मीदवार प्रशांत किशोर की कथित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर की टीम ने अभिषेक बंटी से जुड़े कुछ दस्तावेज और जानकारियां जुटाई थीं, जिन्हें चुनाव नामांकन वापसी की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद सार्वजनिक करने की तैयारी थी। दावा किया जा रहा है कि इन दस्तावेजों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जानी थी, जिसे जन सुराज खेमे में ‘पेपर बम’ के नाम से देखा जा रहा था।

हालांकि, चर्चा है कि इस रणनीति की जानकारी समय से पहले BJP तक पहुंच गई। इसके बाद पार्टी ने संभावित विवाद और कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बना दिया।

क्या थे कथित आरोप?

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारियों के अनुसार, अभिषेक बंटी के नामांकन और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जाने की तैयारी थी।

दावा किया जा रहा है कि उनके खिलाफ दर्ज कुछ मामलों की जानकारी नामांकन पत्र में पूरी तरह से नहीं दी गई थी। इनमें मारपीट और छेड़खानी से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया जा रहा है।
उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि नामांकन में मैट्रिक उत्तीर्ण होने का उल्लेख किया गया था, लेकिन प्रमाणपत्र और उससे जुड़ी जानकारियों को लेकर कुछ विसंगतियों का दावा किया जा रहा है।
इसके अलावा उनके पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा का नाम बिहार के चर्चित चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सामने आने की बात भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है।


आज हो सकता है बड़ा खुलासा

अब सबकी नजर प्रशांत किशोर की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है। माना जा रहा है कि वे अभिषेक बंटी से जुड़े दस्तावेज और अपने आरोपों को सार्वजनिक कर सकते हैं। हालांकि, अब जबकि BJP उम्मीदवार बदल चुकी है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा तो बनेगा, लेकिन इसका सीधा असर उम्मीदवार की वैधता पर नहीं पड़ेगा।

फिलहाल, इन दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सभी पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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