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पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक का अनशन 16वें दिन में पहुंचा, जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन तेज

by Admin
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वांगचुक का कहना है कि देश के लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के कारण उनका भविष्य खतरे में पड़ जाता है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर कमी है, जिससे छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 16वें दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

वांगचुक का कहना है कि देश के लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के कारण उनका भविष्य खतरे में पड़ जाता है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर कमी है, जिससे छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

छात्रों को न्याय और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए कठोर और प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही जिन परीक्षाओं में गड़बड़ियां हुई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। उनका आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रहा है, जिसके कारण छात्रों को बार-बार मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

16 दिन के अनशन से बिगड़ी सेहत

लगातार 16 दिनों से जारी भूख हड़ताल का असर अब सोनम वांगचुक की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार उनका वजन लगातार कम हो रहा है और शारीरिक कमजोरी बढ़ गई है। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की सलाह दी है। हालांकि, वांगचुक ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

अनशन में शामिल छात्रों की भी बिगड़ी तबीयत

आंदोलन में शामिल कई छात्र भी लगातार भूख हड़ताल और धरने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर पड़ने लगे हैं। कुछ छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें एंबुलेंस की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि यह संघर्ष उनके भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए है, इसलिए वे अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

संसद सत्र में संसद मार्च की तैयारी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ऐसे में आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया है। सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों ने आगामी संसद सत्र के दौरान संसद तक मार्च करने का आह्वान किया है, ताकि देशभर के छात्रों की आवाज संसद तक पहुंचाई जा सके।

छात्रों का बढ़ता समर्थन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह नहीं बनेगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

पेपर लीक बना राष्ट्रीय चिंता का विषय

पिछले कुछ वर्षों में देश की कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामले सामने आए हैं। इससे लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और उन्हें आर्थिक व मानसिक नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में सोनम वांगचुक का 16 दिनों से जारी अनशन अब केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग का राष्ट्रीय अभियान बनता जा रहा है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द बातचीत नहीं होती, तो आगामी संसद सत्र के दौरान यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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