नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है।इस आपदा का असर भारत पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, विशेषकर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्री, प्रभावित क्षेत्र में थे। हालांकि भारतीय नागरिकों के लापता होने की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं और अधिकारी उनकी पुष्टि में जुटे हैं।
काठमांडू: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई अचानक बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव अभियान के बीच मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और चीन में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 350 के पार पहुंच चुकी है और 1,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा का असर भारत पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, विशेषकर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्री, प्रभावित क्षेत्र में थे। हालांकि भारतीय नागरिकों के लापता होने की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं और अधिकारी उनकी पुष्टि में जुटे हैं।
राहत वितरण में ‘वन-डोर सिस्टम’ क्यों लागू किया गया?
इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री और आर्थिक सहायता के संग्रह तथा वितरण के लिए ‘वन-डोर सिस्टम’ लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के भीतर या विदेश से आने वाली मदद बिखरे हुए तरीके से वितरित न हो और जरूरतमंद लोगों तक सहायता व्यवस्थित तरीके से पहुंचाई जा सके।
नेपाल के वित्त मंत्रालय के मुताबिक यह व्यवस्था उन व्यक्तियों, निजी क्षेत्र की कंपनियों, दाताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर लागू होती है जो प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष के लिए नकद या सामान के रूप में सहायता देना चाहते हैं। सरकार ने राहत सामग्री के संग्रह और उसके बाद प्रभावित क्षेत्रों तक वितरण के लिए निर्धारित व्यवस्था बनाई है।
क्या सिर्फ पैसे की मदद ही स्वीकार होगी?
नहीं। ‘वन-डोर सिस्टम’ के तहत नकद के अलावा खाद्य सामग्री, जरूरी सामान और अन्य राहत सामग्री भी दी जा सकती है।
सरकार का प्रयास है कि अलग-अलग संस्थाओं द्वारा राहत सामग्री जुटाने और पहुंचाने के बजाय उसकी जानकारी और समन्वय एक केंद्रीय व्यवस्था के माध्यम से हो। इससे एक ही इलाके में जरूरत से ज्यादा सामान पहुंचने और दूसरे प्रभावित इलाकों में राहत नहीं पहुंच पाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
राहत सामग्री के लिए बनाए गए प्रमुख संग्रह केंद्र
नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के संग्रह के लिए अलग-अलग चैनल निर्धारित किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर से आने वाली राहत सामग्री के लिए काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर वेयरहाउस को प्रमुख संग्रह केंद्र बनाया गया है।
घरेलू स्तर पर राहत सामग्री के लिए नुवाकोट के बट्टार स्थित नेपाली सेना की मैथिली बैरक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस व्यवस्था का मकसद राहत सामग्री को एकत्र करने, उसका रिकॉर्ड रखने और जरूरत के मुताबिक प्रभावित इलाकों तक भेजने में बेहतर समन्वय कायम करना है।
हर घर तक मदद कैसे पहुंचेगी?
‘वन-डोर’ का मतलब यह नहीं है कि हर परिवार को सीधे एक ही सरकारी कार्यालय से जाकर सामान लेना होगा। इसका अर्थ मुख्य रूप से राहत के संग्रह और समन्वय को एक केंद्रीय व्यवस्था के तहत लाना है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत का आकलन करेंगी। इसके बाद उपलब्ध राहत सामग्री और आर्थिक संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर उन इलाकों में भेजा जाएगा जहां लोगों को भोजन, पानी, चिकित्सा, अस्थायी आश्रय और अन्य जरूरी सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने भी बचाव, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने को सरकार की प्राथमिकता बताया है।
वित्तीय गड़बड़ी रोकना भी बड़ा उद्देश्य
इतनी बड़ी आपदा के बाद बड़ी मात्रा में आर्थिक सहायता और राहत सामग्री आने की संभावना रहती है। ऐसे समय में अलग-अलग संगठनों और व्यक्तियों द्वारा अपने स्तर पर चंदा या राहत जुटाने से दोहराव, गलत वितरण और वित्तीय अनियमितता की आशंका बढ़ सकती है।
इसी वजह से सरकार ने सहायता को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष और निर्धारित सरकारी चैनलों से जोड़ने पर जोर दिया है। नेपाल सरकार ने लोगों और संस्थाओं से आधिकारिक राहत कोष में योगदान देने की अपील भी की है।
विदेशों से आने वाली मदद पर भी निगरानी
आपदा की भयावहता को देखते हुए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहायता मिल रही है। नेपाल के वित्त मंत्री के अनुसार विश्व बैंक ने करीब 2.5 अरब नेपाली रुपये की वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत, चीन, जापान, एशियाई विकास बैंक और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज की ओर से भी तत्काल सहायता का आश्वासन दिया गया है।
सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में लगभग 2.34 अरब नेपाली रुपये उपलब्ध हैं, जबकि गृह मंत्रालय के लिए 1.17 अरब नेपाली रुपये आवंटित किए जा चुके हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए भी विशेष समन्वय
बाढ़ में विदेशी नागरिकों के प्रभावित होने की खबरों के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक Emergency Response Team (ERT) बनाई है। इसका काम विदेशी नागरिकों की तलाश, जानकारी का सत्यापन, बचाव और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय करना है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाएं न फैलाएं और आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी लें।
आगे की चुनौती सिर्फ राहत नहीं, पुनर्निर्माण भी
फ्लैश फ्लड से करीब 25 कंक्रीट पुलों और 700 मेगावाट की एक जलविद्युत परियोजना को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसका असर परिवहन, बिजली और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नेपाल सरकार ने संकेत दिया है कि तत्काल बचाव और राहत अभियान के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण अभियान चलाया जाएगा।
ऐसे में ‘वन-डोर सिस्टम’ का सबसे बड़ा परीक्षण यही होगा कि राहत की घोषणा से आगे बढ़कर वह दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे परिवारों तक भोजन, पानी, दवा और अस्थायी आश्रय समय पर पहुंचा पाता है या नहीं।
क्यों महत्वपूर्ण है ‘वन-डोर पॉलिसी’?
- राहत सामग्री के वितरण में दोहराव कम करने के लिए।
- आर्थिक सहायता का रिकॉर्ड और निगरानी बेहतर रखने के लिए।
- प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरत के आधार पर सामान भेजने के लिए।
- सरकारी एजेंसियों, सेना, स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच बेहतर समन्वय के लिए।
- आपदा के दौरान अफवाहों और अनधिकृत राहत संग्रह को रोकने के लिए।
- सबसे ज्यादा प्रभावित और दुर्गम इलाकों तक प्राथमिकता के आधार पर मदद पहुंचाने के लिए।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों सहित प्रभावित लोगों की संख्या के बारे में अंतिम स्थिति आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।