रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। छात्र परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं, कथित पेपर लीक और चयन में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन का नेतृत्व स्टूडेंट लीडर देवेंद्रनाथ महतो कर रहे हैं, जिन्होंने 2 अगस्त से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। अब यह आंदोलन पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
जेपीएससी ने 2 जुलाई को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। आयोग ने बताया कि 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा (मेंस) के लिए चयनित हुए हैं। मुख्य परीक्षा की तिथि 18, 19 और 20 जुलाई निर्धारित की गई थी।
लेकिन परिणाम जारी होने के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर कई सवाल उठने लगे। सबसे पहले अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने कैटेगरी-वाइज कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की कथित ओएमआर (Optical Mark Recognition) शीट वायरल हुई। दावा किया गया कि उस अभ्यर्थी ने केवल 48 प्रश्नों के उत्तर भरे थे, फिर भी वह मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हो गया। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इसने छात्रों के बीच नाराजगी और बढ़ा दी।
विवाद तब और गहरा गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या आयोग के किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे, जबकि नियमानुसार परिणाम पर अधिकृत हस्ताक्षर होने चाहिए। बढ़ते विवाद के बीच आयोग ने प्रस्तावित मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया।
छात्रों के आरोप क्या हैं?
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि यह मामला केवल परिणाम में त्रुटि का नहीं बल्कि पूरे भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का है। छात्रों ने आरोप लगाए हैं कि—
परीक्षा का पेपर लीक हुआ।
कई सीटों की खरीद-फरोख्त हुई।
चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही।
ओएमआर और परिणाम में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
आयोग की कार्यप्रणाली संदिग्ध रही।
छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है। उनकी मांग है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
कौन हैं देवेंद्रनाथ महतो?
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्रनाथ महतो झारखंड के छात्र नेता हैं और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े हुए हैं। वे लंबे समय से राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।
जेपीएससी विवाद सामने आने के बाद उन्होंने 25 जुलाई को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना शुरू किया। शुरुआत में आंदोलन में कुछ सौ छात्र शामिल हुए, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने लगा और देखते ही देखते हजारों छात्र इससे जुड़ गए।
धरना स्थल क्यों बदला गया?
26 जुलाई को मोरहाबादी स्थित फुटबॉल स्टेडियम में डूरंड कप के मैच आयोजित होने थे। सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने धरना स्थल बदलने का निर्णय लिया।
इसके बाद आंदोलन को अटल स्मृति वेंडर मार्केट के समीप स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। तब से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वहां पहुंचकर आंदोलन में भाग ले रहे हैं।
विधानसभा घेराव की थी घोषणा
छात्र संगठनों ने पहले 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने की घोषणा की थी। इसी दिन से राज्य विधानसभा का मानसून सत्र भी शुरू होना था। हालांकि बाद में आंदोलन की रणनीति में बदलाव किया गया और अब आमरण अनशन को आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया गया है।
2 अगस्त से आमरण अनशन
आंदोलन को और तेज करने के लिए देवेंद्रनाथ महतो ने 2 अगस्त से आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की घोषणा नहीं करती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
अनशन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचकर समर्थन जता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
JPSC 14वीं परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
जांच सीआईडी के बजाय सीबीआई या ईडी से कराई जाए।
पेपर लीक और सीटों की कथित खरीद-फरोख्त की जांच।
कैटेगरी-वाइज कटऑफ और चयन प्रक्रिया पूरी तरह सार्वजनिक की जाए।
दोषी अधिकारियों और दलालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई।
भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सरकार और आयोग पर बढ़ा दबाव
जैसे-जैसे आंदोलन को छात्रों का समर्थन मिल रहा है, राज्य सरकार और जेपीएससी पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस आंदोलन को लेकर क्या फैसला लेती है, इस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।
फिलहाल देवेंद्रनाथ महतो का आमरण अनशन जारी है और छात्र संगठन इसे झारखंड के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी कर रहे हैं।