बिहार पोलिटिक्स में आरजेडी के 17-18 विधायकों के टूटने की अटकलें लगाई जा रही हैं. अटकलों का आधार जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का एक बयान है. नीरज के बयान के अलावा एक सच यह है कि किसी पार्टी के विधायकों की संख्या छोटी रहने पर दल बदल कानून टूट को और आसान बना देता है. दूसरा सच यह भी कि नए की निष्ठा पर उतना यकीन नहीं किया जा सकता, जितना कई बार से आरजेडी के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचते रहे पुराने विधायकों पर, जिनकी तादाद इस बार 7-8 पर सिमट गई है.
जेडीयू प्रवक्ता और बिहार के पूर्व मंत्री नीरज कुमार के एक बयान से बिहार में हड़कंप मचा है. नीरज ने कहा है कि आरजेडी के 17-18 विधायक एनडीए के संपर्क में हैं. ‘संपर्क’ सियासत का एक ऐसा शब्द है, जिसका सपाट अर्थ पाला बदल या दल बदल से है. नीरज कुमार की तरह ही एनडीए की घटक लोजपा- आर के सर्वेसर्वा और केंद्र में मंत्री चिराग पासवान ने भी कहीं थी. पोलिटिकल एक्सपर्ट इस तरह की संभावना से इनकार भी नहीं करते, इसके बावजूद कि अभी तक आरजेडी के नवनिर्वाचित किसी विधायक ने न इस तरह का कोई बयान दिया है और न कहीं से इसके संकेत ही मिले हैं. हर बात में कयास लगाने वाले सूत्र भी इस मामले में शांत हैं. कोई इस तरह की बात कह भी रहा है तो वह एनडीए की जमात का है.
नीरज का दमदार दावा!
नीरज कुमार और चिराग पासवान ने, संभव है, ऐसी बातें आरजेडी नेताओं को चिढ़ाने के लिए कही हों. पर, दोनों जिम्मेदार व्यक्ति हैं और कोई भी बात ये हल्के में नहीं कहते. इसलिए उनके दावे को दरकिनार भी नहीं किया जा सकता. दरअसल महागठबंधन के 2 बार असफल सीएम फेस रहे तेजस्वी यादव के विधानसभा सत्र छोड़ कर विदेश भ्रमण पर जाने के बाद इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है। चूंकि वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं तो उनकी ज्यादा जरूरत सदन में पार्टी के विधायक महसूस कर रहे थे. खासकर वे विधायक, जो पहली बार जीत कर आए हैं.
25 में 18 पहली बार MLA
आरजेडी के इस बार जीते 25 विधायकों में 17-18 तो पहली बार जीत कर असेंबली आए हैं. सदन में उन्हें किस तरह का आचरण करना है और किस लाइन पर चलना है, यह बताने वाला उनका नेता तो शपथ ग्रहण के बाद से ही गायब है. तेजस्वी के दिल्ली जाने की जानकारी तो लोगों को मीडिया के माध्यम से तो हो गई, इसलिए कि कपिल सिब्बल के चैनल पर उनका इंटरव्यू प्रसारित हुआ. पर, वे विदेश भ्रमण पर चले गए, इसकी कोई अधिकृत जानकारी किसी को नहीं है।
विधायक पहले भी टूटे हैं
बिहार में विधायकों का टूटना कोई नई बात नहीं है. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजे घोषित होने के बाद बसपा के जमा खान जेडीयू में आ गए थे. चिराग पासवान के नेतृत्व वाली एलजेपी के इकलौते विधायक ने जेडीयू ज्वाइन कर ली थी. बाद के दिनो मे वीआईपी के सभी चार विधायकों ने भाजपा से हाथ मिला लिया था. एनडीए तो सत्ता में था। उसकी पार्टियों के साथ सटना तो समझ में आता है, लेकिन सत्ता पाने का सपना दिखा कर आरजेडी ने भी ओवैसी की AIMIM के 4 विधायक झटक लिए थे. हालांकि आरजेडी अक्षुण्ण नहीं रह पाए तो इस पर अचरज नहीं होना चाहिए. विधायकों की संख्या छोटी रहने पर दल बदल कानून टूट को और आसान बना देता है. एक बात यह भी कि नए विधायकों की निष्ठा पर उतना यकीन नहीं किया जा सकता, जितना कई बार से आरजेडी के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुचते रहे पुराने विधायकों पर, जिनकी तादाद इस बार 7-8 पर सिमट गई है.


