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रायगढ़ में अढाई लाख पेड़ों की कत्तल से 75% जिला होगा प्रभावित, भीमाशंकर परियोजना पर प्रकाश आंबेडकर का सरकार पर तीखा हमला; जुन्नर में तेंदुओं के आतंक का दिया हवाला

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मुंबई:रायगढ़ और भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में प्रस्तावित पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं (Pumped Storage Projects) के लिए हो रही अंधाधुंध वनों की कटाई को लेकर वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रकाश आंबेडकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रायगढ़ जिले में वर्तमान में ऐसे 5 बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी वजह से तीन-चौथाई (लगभग 75 प्रतिशत) रायगढ़ जिला पूरी तरह से प्रभावित और पर्यावरण संकट की चपेट में आ जाएगा. उन्होंने सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वृक्षतोड़ के संदर्भ में प्रशासन द्वारा दी गई आकडेवारी पूरी तरह झूठी है और इन परियोजनाओं के लिए वास्तविक रूप से अढाई लाख से अधिक पेड़ों की बलि दी जा रही है.

मुख्यमंत्री द्वारा भीमाशंकर पर्वत श्रृंखला की रेंज को 15 किलोमीटर बताकर वहां होने वाली वनों की कटाई को न्यायसंगत ठहराने के प्रयास पर प्रकाश आंबेडकर ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक ईकोसिस्टम का वैज्ञानिक तर्क देते हुए स्पष्ट किया कि प्रकृति में हर जंगली जानवर और हिंसक जीव का एक निश्चित शिकार और निवास क्षेत्र (Territorial Zone) होता है, जिससे बाहर वे सामान्यतः नहीं जाते. लेकिन जब विकास के नाम पर उनके मूल जंगलों को नष्ट कर दिया जाता है और उनके प्राकृतिक आवास में इंसानी दखल बढ़ता है, तो वे मजबूरन इंसानी बस्तियों की तरफ रुख करते हैं. इसका प्रत्यक्ष और खौफनाक उदाहरण वर्तमान में पुणे के जुन्नर तालुका में देखने को मिल रहा है, जहां वनों के विनाश के कारण तेंदुओं (बिबट्या) का वावर इंसानी रिहायशी इलाकों और गन्ने के खेतों में अत्यधिक बढ़ गया है, जिसके चलते वहां आए दिन तेंदुओं के जानलेवा हमले हो रहे हैं और स्थानीय ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह दहशत में है.

प्रकाश आंबेडकर ने चेतावनी दी है कि रायगढ़ में चल रहे इन 5 थर्मल और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के कारण सह्याद्री के अति-संवेदनशील गलियारे हमेशा के लिए तबाह हो जाएंगे, जिससे न केवल क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा बल्कि आदिवासियों और स्थानीय किसानों का अस्तित्व भी संकट में आ जाएगा. सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण की इस बड़ी तबाही पर पर्दा डाल रही है. वंचित बहुजन आघाडी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इस विनाशकारी नीति और पर्यावरण के साथ होने वाले खिलवाड़ के खिलाफ प्रभावित ग्रामीणों, आदिवासियों और पर्यावरणविदों को एकजुट कर पूरे महाराष्ट्र में ‘सह्याद्री बचाओ’ आंदोलन के तहत सड़कों पर उतरकर तीव्र कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ी जाएगी.

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