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नेपाल बाढ़ में तबाही: मृतकों का आंकड़ा 1295 के पार, हजारों अब भी लापता; भारत ने बढ़ाई राहत और बचाव की मदद

by Admin
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भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में फंसे अब तक 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से तीन भारतीयों को गुरुवार को बचाया गया। हालांकि, 275 भारतीयों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल में फंसे अन्य नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद पैदा हुए हालात ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1295 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 5 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में फंसे अब तक 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से तीन भारतीयों को गुरुवार को बचाया गया। हालांकि, 275 भारतीयों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल में फंसे अन्य नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

भारत ने भेजी करीब 95 टन राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल में भारत की ओर से चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल सरकार की जरूरतों और मांग के मुताबिक आगे भी सहायता उपलब्ध कराता रहेगा।

जायसवाल के अनुसार, गुरुवार को भारत के दो विमान करीब 21 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचे। अब तक भारत की ओर से सात विमानों के जरिए लगभग 95 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है।

भारत की ओर से भेजी जा रही सहायता में राहत एवं बचाव से जुड़ा जरूरी सामान शामिल है। नेपाल सरकार की मांग के आधार पर आने वाले दिनों में फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य आवश्यक सामग्री भी भेजने की तैयारी है।

राहत-बचाव के लिए भारतीय विशेषज्ञ भी नेपाल में तैनात

सिर्फ राहत सामग्री ही नहीं, बल्कि भारत ने विशेषज्ञ टीमों को भी नेपाल भेजा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए भारत ने 54 विशेषज्ञों और मेडिकल कर्मियों को भेजा है।

इनमें 30 टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय बचाव और फोरेंसिक टीमें नेपाल में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि राहत सामग्री भेजने के साथ-साथ जमीन पर विशेषज्ञों की मौजूदगी का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और आपदा में जान गंवाने वालों तथा लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया में मदद करना है।

नेपाल के सामने बड़ी चुनौती: हजारों लोग अभी भी लापता

बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना है। 5 हजार से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद बचाव एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

कई प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ के कारण सड़क संपर्क और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में राहत दलों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ विस्थापित परिवारों तक भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाना भी राहत एजेंसियों की प्राथमिकता है।

चीन ने भी तिब्बत से नेपाली नागरिकों को बचाया

नेपाल में जारी राहत अभियान के बीच चीन की ओर से भी बचाव अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को तिब्बत से 155 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया

इनमें से 145 नेपाली नागरिक रसुवा जिले के रहने वाले बताए गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और खराब मौसम के कारण फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बचाव अभियान चलाया गया।

भारत-नेपाल के बीच राहत सहयोग जारी

नेपाल में पैदा हुए इस बड़े संकट के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि वह नेपाल सरकार की जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री और तकनीकी सहायता भेजता रहेगा। आने वाले दिनों में फोरेंसिक उपकरणों, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति बढ़ाए जाने की योजना है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना, प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना और विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। 1295 मौतों और हजारों लोगों के लापता होने के बीच नेपाल के लिए यह संकट बड़े पैमाने पर मानवीय राहत अभियान की मांग कर रहा है। भारत समेत विभिन्न एजेंसियों की मदद के बावजूद आने वाले दिन राहत और बचाव अभियान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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