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झारखंड छात्र आंदोलन में बड़ा मोड़: सरकार से बातचीत को तैयार छात्र, लेकिन रखी एक अहम शर्त; परीक्षा कराने वाली कंपनी का अकाउंटेंट गिरफ्तार

by Admin
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रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं को बुधवार को सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव मिला। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने बताया कि सरकार की ओर से पहुंचे एसडीओ ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे हैं। इसके बाद बैठक की तारीख और समय तय किया जाएगा।

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कई दिनों से धरने और आमरण अनशन पर बैठे छात्रों ने राज्य सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमति जता दी है, लेकिन इसके साथ एक स्पष्ट शर्त भी रखी है। छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं मीडिया की मौजूदगी में बातचीत करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह की गलतफहमी न हो।

इधर, मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के अकाउंटेंट सहित पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।

सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने रखी पारदर्शिता की शर्त

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं को बुधवार को सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव मिला। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने बताया कि सरकार की ओर से पहुंचे एसडीओ ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे हैं। इसके बाद बैठक की तारीख और समय तय किया जाएगा।

हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे तभी बातचीत करेंगे जब मुख्यमंत्री स्वयं मौजूद रहें और बैठक के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।

छात्रों का आरोप है कि सरकार केवल पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर आंदोलन की ताकत को कमजोर करना चाहती है। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरे राज्य के हजारों अभ्यर्थियों का है, इसलिए बातचीत भी पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।

आमरण अनशन जारी, CBI और ED जांच की मांग

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र अभी भी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि पूरे भर्ती घोटाले की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

CID की बड़ी कार्रवाई, अकाउंटेंट समेत पांच गिरफ्तार

जांच में जुटी सीआईडी ने बुधवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें परीक्षा आयोजित करने वाली आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) का अकाउंटेंट रक्षक सिंह भी शामिल है।

अब तक इस मामले में कुल 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया, डेटा प्रबंधन और परिणाम तैयार करने में हुई कथित अनियमितताओं की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही हैं।

आखिर क्यों भड़का छात्रों का आंदोलन?

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 2 जुलाई को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। इसमें 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच आयोजित होनी थी।

परिणाम जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप था कि आयोग ने कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की कथित OMR शीट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि उसने केवल 48 प्रश्न हल किए, फिर भी वह मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हो गया।

इसके अलावा परिणाम सूची पर आयोग के अधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। बढ़ते विरोध और सवालों के बीच आयोग ने अंततः मुख्य परीक्षा रद्द कर दी।

सरकार ने बनाई चार मंत्रियों की समिति

बढ़ते आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की एक समिति गठित की है। इसमें शामिल हैं—

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा
उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव

बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर इन मंत्रियों के साथ बैठक हुई, जिसमें आंदोलन के समाधान और छात्रों से बातचीत की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके बाद छात्र नेताओं को वार्ता का निमंत्रण भेजा गया, लेकिन पहली कोशिश में सहमति नहीं बन सकी।

सोनम वांगचुक ने की अपील

आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अन्न और जल दोनों का त्याग कर रखा था। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए उनसे बातचीत की और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कम से कम पानी पीने की अपील की।

सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पानी तो पी लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आमरण अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।

फिलहाल क्या स्थिति है?

एक ओर सरकार बातचीत के जरिए आंदोलन खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपने रुख पर कायम हैं। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित बैठक पर टिकी है। यदि वार्ता सफल होती है तो लंबे समय से जारी यह आंदोलन समाधान की ओर बढ़ सकता है, लेकिन यदि सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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