बसपा सुप्रीमो ने संसद में हुई बहस पर भी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर भी अधिकांश राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ सके। चर्चा के दौरान समस्या के समाधान पर गंभीर विचार-विमर्श की बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप अधिक देखने को मिला।
नई दिल्ली/लखनऊ: लोकसभा में बुधवार को हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक (संशोधन) बिल ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सदन में बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर भी संसद में काफी हंगामा हुआ। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल कड़े कानून बना देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा।
केवल सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा अपराध
मायावती ने कहा कि पेपर लीक के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और कई छात्रों ने निराशा में आत्महत्या जैसे दुखद कदम भी उठाए हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के उद्देश्य से संसद ने एक बार फिर कठोर सजा का प्रावधान करने वाला कानून पारित किया है, लेकिन लोगों के मन में अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या केवल कानून बनाने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम पेपर लीक होने के बाद दोषियों को कड़ी सजा देने पर केंद्रित है, जबकि सबसे महत्वपूर्ण बात अपराध होने से पहले उसे रोकना है। उनके अनुसार अपराध नियंत्रण और रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है, जिसका प्रमाण यह है कि पहले बने कानून भी इस समस्या को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुए।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत
बसपा प्रमुख ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल कानून की कमजोरी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गहरी खामियों का परिणाम हैं। उनका मानना है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने चाहिए, जिनमें—
सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
शिक्षा को महंगे और शोषणकारी ऋणों से मुक्त कर अधिक सुलभ बनाना।
गरीब, दलित, पिछड़े और मेहनतकश परिवारों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना।
परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना।
उन्होंने कहा कि यही बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान की मूल भावना भी है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में इसका गंभीर अभाव दिखाई देता है।
अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती शिक्षा की खाई
मायावती ने कहा कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध करा लेते हैं, जबकि करोड़ों गरीब और प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक व व्यवस्थागत कमियों के कारण पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था की केवल एक समस्या है, जबकि इसकी जड़ें कहीं अधिक गहरी और गंभीर हैं।
उनके अनुसार यदि शिक्षा व्यवस्था में ईमानदारी, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित नहीं किए गए, तो केवल नए कानून बनाकर देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता।
संसद की बहस पर भी जताई नाराजगी
बसपा सुप्रीमो ने संसद में हुई बहस पर भी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर भी अधिकांश राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ सके। चर्चा के दौरान समस्या के समाधान पर गंभीर विचार-विमर्श की बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप अधिक देखने को मिला।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून बनाने के पीछे गंभीर राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा, तो नया कानून कितना सफल साबित होगा, इस पर लोगों का संदेह स्वाभाविक है।
सरकार से बेहतर उपायों पर विचार की अपील
मायावती ने केंद्र सरकार से अपील की कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल कठोर दंड का सहारा लेने के बजाय परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने जैसे ठोस कदम भी उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों, विशेषकर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए व्यापक और ईमानदार सुधार ही स्थायी समाधान साबित हो सकते हैं।