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रिटेल महंगाई 4% के पार, कांग्रेस ने कहा- BJP राज में महंगाई ने तोड़ा जनता का दम

by Admin
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जनवरी 2026 से लागू नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला के तहत यह पहली बार है कि खुदरा महंगाई 4 फीसदी के स्तर को पार कर गई है। इस नई श्रृंखला का आधार वर्ष (Base Year) 2024 रखा गया है।

नई दिल्ली। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महंगाई में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं, खासकर सब्जियों, दालों, फलों और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रही। इसके चलते महंगाई की दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर चली गई है।

जनवरी 2026 से लागू नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला के तहत यह पहली बार है कि खुदरा महंगाई 4 फीसदी के स्तर को पार कर गई है। इस नई श्रृंखला का आधार वर्ष (Base Year) 2024 रखा गया है।

महंगाई के ताजा आंकड़े सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन कठिन बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के दौरान लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।

जयराम रमेश ने लिखा, “मोदी सरकार के 12 साल का यही असली सार है—झूठे वादों की बहार और जनता पर महंगाई व बेरोजगारी का क्रूर वार।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि आखिर वे आम लोगों की बढ़ती आर्थिक परेशानियों पर कब बोलेंगे।

कांग्रेस का कहना है कि रसोई का खर्च लगातार बढ़ने से मध्यम वर्ग और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। घरों का मासिक बजट बिगड़ रहा है और बचत करना पहले के मुकाबले अधिक मुश्किल होता जा रहा है।

वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि खाद्य महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो इसका असर आम लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) और उपभोग पर पड़ सकता है। हालांकि, यदि आने वाले महीनों में अच्छी बारिश और बेहतर फसल होती है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य रखता है, जबकि 4 फीसदी इसका मध्यम अवधि का लक्ष्य है। ऐसे में जून के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई की चाल पर सरकार और RBI दोनों की नजर बनी रहेगी।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, मौसम और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का असर खाद्य कीमतों पर पड़ता है। सरकार का दावा है कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद विपक्ष और सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है।

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