Home » 15 बच्चों की मौत, लेकिन कोई भी आग से नहीं जला; KGMU ने बताई मौत की असली वजह

15 बच्चों की मौत, लेकिन कोई भी आग से नहीं जला; KGMU ने बताई मौत की असली वजह

by Admin
0 comments 56 views

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रोफेसर के.के. सिंह के मुताबिक, इस हादसे में किसी भी बच्चे की मौत जलने से नहीं हुई है। सभी बच्चों की जान धुएं के कारण दम घुटने से गई। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद कुल 22 बच्चों को केजीएमयू लाया गया था, जिनमें से पांच बच्चों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।

लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनिमेशन कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 बच्चों की मौत हो चुकी है। शुरुआती तौर पर माना जा रहा था कि सभी बच्चे आग की लपटों में झुलसने से मारे गए, लेकिन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने मौत की वजह को लेकर बड़ा खुलासा किया है।

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रोफेसर के.के. सिंह के मुताबिक, इस हादसे में किसी भी बच्चे की मौत जलने से नहीं हुई है। सभी बच्चों की जान धुएं के कारण दम घुटने से गई। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद कुल 22 बच्चों को केजीएमयू लाया गया था, जिनमें से पांच बच्चों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।

प्रोफेसर सिंह ने बताया कि पांच बच्चों को मामूली चोटें थीं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। वहीं, दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। इनमें एक बच्ची की जांघ में चोट आई है और वह मानसिक आघात (मेंटल ट्रॉमा) से गुजर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उसकी स्थिति स्थिर है और वह जल्द ठीक हो सकती है।

दूसरा बच्चा तीसरी मंजिल से जान बचाने के लिए नीचे कूद गया था। उसकी कमर गंभीर रूप से घायल हुई है और रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) में चोट पहुंची है। डॉक्टरों के अनुसार, उसके शरीर का निचला हिस्सा फिलहाल सुन्न है। उसकी सीटी स्कैन रिपोर्ट आ चुकी है और आगे एमआरआई के बाद यह तय किया जाएगा कि उसे सर्जरी की आवश्यकता है या नहीं।

प्रोफेसर के.के. सिंह ने बताया कि कोचिंग सेंटर के जिस कमरे में बच्चे फंसे थे, वहां धुआं तेजी से भर गया था। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था और खिड़कियां खुलने वाली नहीं थीं। धुआं बच्चों के फेफड़ों में भर गया, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर गया। इसके साथ ही धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड गैस ने उनकी जान ले ली।

उन्होंने कहा कि बिल्डिंग में सिर्फ टफन ग्लास लगे थे। बच्चों ने बाहर निकलने और धुआं निकालने के लिए इन शीशों को तोड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। अगर शीशे टूट जाते और धुएं के निकलने का रास्ता बन जाता, तो संभव है कि कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर इमारतों में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और पर्याप्त वेंटिलेशन की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

You may also like

Leave a Comment