उद्धव ठाकरे ने कहा, “जिस भाजपा को उसके शुरुआती दौर में शिवसेना ने आगे बढ़ने में मदद की, आज वही पार्टी शिवसेना को तोड़ने का पाप कर रही है। भाजपा दूसरों के बच्चे चुराने का काम करती है।”
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी में हुई टूट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। रविवार को मुंबई के भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की बनाई शिवसेना ने करीब 30 वर्षों तक कांग्रेस से वैचारिक लड़ाई लड़ी, लेकिन कांग्रेस ने कभी पार्टी को तोड़ने या उसका नाम और पहचान छीनने की कोशिश नहीं की। यह काम भाजपा ने किया है।
उद्धव ठाकरे ने कहा, “जिस भाजपा को उसके शुरुआती दौर में शिवसेना ने आगे बढ़ने में मदद की, आज वही पार्टी शिवसेना को तोड़ने का पाप कर रही है। भाजपा दूसरों के बच्चे चुराने का काम करती है।”
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें शाह ने कहा था कि अब केवल एक ही शिवसेना है और उसका नेतृत्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। उद्धव ने दावा किया कि उनके नेतृत्व वाली शिवसेना ही असली और मूल शिवसेना है और कुछ सांसदों की बगावत से वे निराश नहीं हैं।
इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों की बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। बागी सांसदों में धराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने खुलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की है। वहीं, हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि उनकी नाराजगी उद्धव ठाकरे से नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास और संसाधनों की कमी को लेकर है।
17 जून को छह बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। सांसदों ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता शिवसेना का कांग्रेस में विलय चाहते थे और पार्टी की मूल विचारधारा से समझौता किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शिवसेना के अस्तित्व और विचारधारा को बचाने के लिए उन्होंने अलग राह चुनी है।
गौरतलब है कि जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी और चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया था। अब छह सांसदों की बगावत पिछले चार वर्षों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए दूसरी बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आई है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, लोकसभा में नौ सांसदों वाली शिवसेना (यूबीटी) में यदि छह सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। हालांकि, भविष्य में उनकी कानूनी स्थिति को पूरी तरह मजबूत करने के लिए किसी अन्य दल में विलय की प्रक्रिया भी अहम मानी जा रही है।