अनुसूचित जातियों (एससी) के आरक्षण के उपवर्गीकरण के विरोध में शनिवार को नागपुर में दीक्षाभूमि से जिला कलेक्टर कार्यालय तक एक विशाल मोर्चा निकला गया जो संविधान चौक पर आयोजित एक सार्वजनिक सभा के साथ संपन्न हुआ । यद्यपि यह मोर्चा विदर्भ स्तर पर आयोजित किया गया था लेकिन इसमें महाराष्ट्र भर से सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, युवा समूहों और कर्मचारी संगठनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

नागपुर : अनुसूचित जातियों में उपवर्गीकरण को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए हैं, जिसके चलते राज्यभर में मोर्चे, धरने और आंदोलन शुरू हैं। इसी क्रम में शनिवार को नागपुर में उपवर्गीकरण विरोधी समिति द्वारा निकाले गए मोर्चे में विदर्भ के हजारों समाजबंधुओं ने अभूतपूर्व संख्या में भाग लिया।

दीक्षाभूमि से संविधान चौक तक निकाले गए इस मोर्चे में हजारों लोगों की उपस्थिति के कारण नागपुरवासियों को भारी यातायात जाम का सामना करना पड़ा। जातियों के बीच विभाजन पैदा करने वाली सरकार की नीतियों का मोर्चे में शामिल लोगों ने विरोध करते हुए आक्रोश व्यक्त किया। उपवर्गीकरण के इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो सरकार को व्यापक असंतोष का सामना करना पड़ेगा।
दीक्षाभूमि के पास स्थित लोकशाहीर साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा के समीप से शुरू हुआ यह मोर्चा संविधान चौक पर जाकर समाप्त हुआ।

राजनीतिक दलों से रुख स्पष्ट करने की अपील
मोर्चे में शामिल नागरिकों ने सभी राजनीतिक दलों से उपवर्गीकरण पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की अपील की। उनका कहना था कि यह थोपी गई व्यवस्था है और राजनीतिक दल इसका अपने हित में उपयोग कर रहे हैं। इसके प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और कई दशकों तक दिखाई देंगे। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

59 जातियों के समाजबंधुओं की भागीदारी
कड़ी धूप और दूर-दराज से आने के बावजूद समाजबंधुओं ने बड़ी संख्या में मोर्चे में भाग लिया। इस मोर्चे में छोटे बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों और वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही।
आयोजकों ने कहा कि यह मोर्चा अनुसूचित जातियों के संवैधानिक आरक्षण अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध करने के लिए आयोजित किया गया है. अनुसूचित जातियों को पहले से ही संविधान की अनुसूची में शामिल किया गया है और उपवर्गीकरण की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य मांग यह रखी गई कि केंद्र और राज्य सरकारें अनुसूचित जाति आरक्षण में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से बचें और उपवर्गीकरण से संबंधित किसी भी निर्णय को तत्काल वापस लें।
विदर्भ भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी
इस मार्च में विदर्भ के विभिन्न जिलों, जिनमें यवतमाल, चंद्रपुर, वर्धा, गड़चिरोली और नागपुर शामिल हैं, से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे। मार्च में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पूरे रैली मार्ग और संविधान चौक क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया था।
सभा को संबोधित करते हुए कई वक्ताओं ने अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण नीतियों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय के व्यापक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। रैली की सफलता का श्रेय अनेक आयोजकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों को दिया गया, जिनमें अमन कांबले, स्मिता कांबले, प्रीतम बुलबुले और अन्य शामिल थे।