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व्हाइट हाउस में गूंजा बुद्ध का संदेश, वेसाक 2026 पर शांति और करुणा का आह्वान

by Admin
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इंटरनेशनल बौद्ध एसोसिएशन ऑफ अमेरिका की ओर से, व्हाइट हाउस फेथ ऑफिस में आयोजित इस पाँचवें व्हाइट हाउस वेसाक समारोह का आयोजन किया गया। विहत ११ जून को हुए इस कार्यक्रम में भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण का स्मरण किया गया.

पाँचवें व्हाइट हाउस वेसाक समारोह का आयोजन

इंटरनेशनल बौद्ध एसोसिएशन ऑफ अमेरिका की ओर से, व्हाइट हाउस फेथ ऑफिस में आयोजित इस पाँचवें व्हाइट हाउस वेसाक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए वांगमो डिक्से ,अध्यक्ष, इंटरनेशनल बौद्ध एसोसिएशन ऑफ अमेरिका (IBAA) ने कहा कि मैं व्हाइट हाउस फेथ ऑफिस, विशेष रूप से पादरी पाउला व्हाइट-कैन, के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करना चाहती हूँ, जिन्होंने ऐसे अवसरों का निर्माण किया है जहाँ विभिन्न आस्थाओं और परंपराओं के लोग मित्रता, पारस्परिक सम्मान और समझदारी की भावना के साथ एक साथ आ सकते हैं।

विविध आध्यात्मिक परंपराओं का राष्ट्र की समृद्धि में योगदान

यह वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा राष्ट्र संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह अत्यंत उपयुक्त है कि हम इस ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित हुए हैं, जहाँ अनेक संस्कृतियों, परंपराओं और आस्थाओं का प्रतिनिधित्व हो रहा है। हम सभी शांति, आपसी समझ और सबके लिए एक बेहतर भविष्य की साझा आकांक्षाओं से एकजुट हैं। हमें धार्मिक स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान जैसे अमेरिकी आदर्शों का संबल प्राप्त है—ऐसे मूल्य जिन्होंने विविध आध्यात्मिक परंपराओं को विकसित होने और हमारे राष्ट्र की समृद्धि में योगदान देने का अवसर प्रदान किया है।

आगे बोलते हुए श्रीमती डिक्से ने कहा कि हमारा प्रतिनिधिमंडल अमेरिका भर के उन बौद्ध समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनकी जड़ें कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, ताइवान, तिब्बत, दक्षिण कोरिया और वियतनाम में हैं। ये सभी समुदाय इंटरनेशनल बौद्ध एसोसिएशन ऑफ अमेरिका के अंतर्गत एकत्रित हुए हैं। यहाँ हमारी उपस्थिति वैश्विक बौद्ध समुदाय की समृद्ध विविधता और अमेरिका में विकसित हुई सद्भावना की भावना दोनों को प्रतिबिंबित करती है। यद्यपि हमारी परंपराएँ स्वरूप और अभिव्यक्ति में भिन्न हो सकती हैं, फिर भी हम प्रज्ञा, करुणा और समस्त प्राणियों के कल्याण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता में एकजुट हैं। हम मिलकर यह प्रदर्शित करते हैं कि एकता के लिए एकरूपता आवश्यक नहीं है, और हमारी विविधता ही हमारी शक्ति, समझ और पारस्परिक सम्मान का स्रोत बन सकती है।

भगवान बुद्ध की शिक्षाओं ने भारत में अपनी यात्रा आरंभ की और विश्वभर में फैल गईं

2,600 वर्ष से भी अधिक समय पहले, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं ने भारत में अपनी यात्रा आरंभ की और पर्वतों, महासागरों, भाषाओं, संस्कृतियों और सभ्यताओं को पार करते हुए विश्वभर में फैल गईं। उनका स्थायी प्रभाव उनके सार्वभौमिक संदेश का प्रमाण है—एक ऐसा संदेश जो मानवता की प्रज्ञा, करुणा, जीवन के अर्थ और शांति की आकांक्षा को संबोधित करता है।

आज बौद्ध धर्म का पालन विश्वभर में करोड़ों लोग करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 4,000 मंदिर, मठ, ध्यान केंद्र और बौद्ध साधना समुदाय जीवन के सभी क्षेत्रों से आने वाले लोगों की सेवा कर रहे हैं। अमेरिका की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यहाँ थेरवाद, महायान और वज्रयान—तीनों बौद्ध परंपराएँ साथ-साथ विकसित और समृद्ध हुई हैं। अनेक देशों में किसी एक ही बौद्ध परंपरा का प्रभाव देखने को मिलता है,

एकता के लिए एकरूपता आवश्यक नहीं

श्रीमती डिक्से ने कहा कि लेकिन अमेरिका में हमें एक-दूसरे से सीखने, एक-दूसरे की सराहना करने और परस्पर सहयोग करने का अवसर प्राप्त होता है, जबकि हम अपने साझा मूल्यों में एकजुट बने रहते हैं।

शायद यह संदेश आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे संसार में, जो अक्सर विभाजित प्रतीत होता है, हमारा यह समागम हमें याद दिलाता है कि एकता के लिए एकरूपता आवश्यक नहीं है। हम भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, पृष्ठभूमियों और धार्मिक परंपराओं से आ सकते हैं, फिर भी हम आपसी सम्मान, मित्रता और सामूहिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।

यह भावना केवल बौद्ध धर्म तक सीमित नहीं है। आज हम अपने ईसाई भाइयों-बहनों और अनेक अन्य आस्था परंपराओं के लोगों के साथ खड़े हैं। यद्यपि हमारे मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं, फिर भी हम करुणा, सेवा, उदारता, सत्यनिष्ठा और दूसरों की देखभाल जैसे समान मूल्यों को साझा करते हैं। अनेक दृष्टियों से यह समागम अमेरिका की सर्वोत्तम भावना को प्रतिबिंबित करता है—एक ऐसा राष्ट्र जहाँ विभिन्न विश्वासों के लोग स्वतंत्रता, पारस्परिक सम्मान और साझा उद्देश्य के साथ एक साथ आते हैं।

श्रीमती डिक्से ने कहा कि आज हम वेसाक कैसे मनाएँ ? केवल 2,600 वर्ष से भी अधिक पहले घटित घटनाओं को स्मरण करके नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारकर—

विभाजन के स्थान पर समझ और सद्भाव को चुनकर।
दुःख और पीड़ा से जूझ रहे लोगों की देखभाल करके।
एक-दूसरे के साथ गरिमा और सम्मान का व्यवहार करके।
और यह स्वीकार करके कि हममें से प्रत्येक के भीतर दूसरों के जीवन में प्रकाश, आशा और करुणा का स्रोत बनने की क्षमता है।

श्रीमती डिक्से ने आगे कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की तुलना अक्सर एक दीपक से की जाती है। एक अकेला दीपक अंधेरे कमरे को प्रकाशित कर सकता है, लेकिन जब अनेक दीपक एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो उनका प्रकाश दूर-दूर तक फैल जाता है।

कार्यक्रम के दौरान दीपों को प्रज्वलित किया गया और इस वक़्त समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना की गयी. साथ ही अमेरिका में शांति प्रस्थापित होने की प्राथना के साथ साथ संपूर्ण विश्व में शांति की बहाल हो ऐसी प्रार्थना भी इस वक़्त की गई।

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