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सुजात आंबेडकर की हुंकार: कुंभ मेले के ₹35 हजार करोड़ किसानों के लिए खर्च करे सरकार; आंबेडकरवादी आंदोलन मजबूत करने का आह्वान

by Admin
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येवला मुक्ति भूमि से सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष तेज करने का संदेश; साहिल वाकोडे प्रकरण, एससी-एसटी फंड और सूखे के मुद्दे पर उठाए सवाल

येवला, 14 अक्टूबर 2026। वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की ऐतिहासिक धर्मांतरण घोषणा की वर्षगांठ के अवसर पर येवला मुक्ति भूमि में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने बाबासाहेब के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन के मिशन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके फेसबुक पोस्ट के अनुसार, बाबासाहेब ने येवला की ऐतिहासिक भूमि से अन्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का आह्वान किया था और वंचित समाज को सम्मान के साथ जीने की राह दिखाई थी।

सुजात आंबेडकर ने अपने संदेश में कहा कि बाबासाहेब की धर्मांतरण घोषणा भले ही धम्म परिवर्तन से जुड़ी थी, लेकिन इसके पीछे व्यापक सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का उद्देश्य था। इसलिए बौद्ध धम्म स्वीकार करने के साथ-साथ बाबासाहेब के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष को भी आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने युवा पीढ़ी से इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाने और बाबासाहेब के सपनों का प्रबुद्ध भारत बनाने के लिए सक्रिय होने का आह्वान किया।

धम्म क्रांति के साथ राजनीतिक संघर्ष भी जरूरी

सुजात आंबेडकर के अनुसार, बाबासाहेब के विचारों को केवल धार्मिक परिवर्तन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उनका मिशन सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और राजनीतिक अधिकारों की स्थापना से भी जुड़ा था।

उन्होंने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह समाज ने बाबासाहेब के धम्म परिवर्तन के विचार को स्वीकार किया, उसी तरह उनके सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष को भी अपनाना होगा। उनके मुताबिक, वंचित समाज को अपने अधिकारों की रक्षा और समानता की स्थापना के लिए संगठित राजनीतिक शक्ति खड़ी करनी होगी।

भीमा कोरेगांव और महाबोधि महाविहार के मुद्दे पर वंचित बहुजन आघाड़ी का उल्लेख

सुजात आंबेडकर ने अपने संदेश में भीमा कोरेगांव और बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार के संरक्षण के लिए वंचित बहुजन आघाड़ी द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख किया।

उन्होंने महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित निधि को लाडकी बहिण योजना के लिए स्थानांतरित किए जाने का आरोप भी उठाया। पोस्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट के आवास पर मोर्चा निकालकर विरोध दर्ज कराया गया था।

इन मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि आंबेडकरवादी आंदोलन को सामाजिक न्याय, ऐतिहासिक विरासत और वंचित समुदायों के अधिकारों के सवाल पर लगातार सक्रिय रहना होगा।

साहिल वाकोडे प्रकरण पर जातिवाद का आरोप

सुजात आंबेडकर ने अपने फेसबुक पोस्ट में आईआईटी बॉम्बे के विद्यार्थी साहिल वाकोडे से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित विद्यार्थियों के बारे में आज भी ऐसी जातिवादी टिप्पणियां की जाती हैं, जिनमें उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को कमतर दिखाया जाता है या उन्हें आरक्षण के कारण आगे बढ़ने वाला बताया जाता है।

साहिल वाकोडे पर कथित नकल के आरोप का संदर्भ देते हुए सुजात आंबेडकर ने दावा किया कि इस मामले के जरिए बौद्ध और आंबेडकरवादी समाज को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। यह उनकी ओर से लगाया गया आरोप है; मामले के सभी तथ्यों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

उन्होंने भीमा कोरेगांव, डॉ. पायल तडवी और साहिल वाकोडे से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ प्रभावी संघर्ष के लिए महाराष्ट्र की राजनीति में आंबेडकरवादी राजनीतिक दल की मजबूत भूमिका जरूरी है।

युवाओं से आंदोलन की कमान संभालने की अपील

सुजात आंबेडकर ने युवा पीढ़ी से बाबासाहेब के सामाजिक और राजनीतिक मिशन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, शिक्षा, समानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जातीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष जैसे मुद्दों पर युवाओं को आगे आना चाहिए।

उनके संदेश का जोर इस बात पर रहा कि बाबासाहेब के विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें सामाजिक और राजनीतिक जीवन में लागू करना आवश्यक है। इसके लिए आंबेडकरवादी समाज को संगठित होकर अपनी आवाज मजबूत करनी होगी।

कुंभ मेले के ₹35 हजार करोड़ किसानों को देने की मांग

सुजात आंबेडकर ने अपने फेसबुक पोस्ट में नासिक में होने वाले कुंभ मेले के बजट को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की समस्याओं का हवाला देते हुए मांग की कि कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित ₹35 हजार करोड़ की राशि किसानों और सूखाग्रस्त लोगों की सहायता के लिए इस्तेमाल की जाए।

उन्होंने सरकार से अपील की कि धार्मिक आयोजन पर होने वाले बड़े खर्च की तुलना में संकट का सामना कर रहे किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उनके संदेश का मुख्य जोर कृषि संकट से जूझ रहे परिवारों को राहत देने पर था।

हालांकि, ₹35 हजार करोड़ की राशि के संबंध में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह कुंभ मेले से जुड़ी प्रस्तावित विकास परियोजनाओं और खर्च का आंकड़ा है या केवल आयोजन पर होने वाले खर्च का। इसकी आधिकारिक बजट संबंधी जानकारी अलग से देखी जानी चाहिए।

येवला मुक्ति भूमि से प्रबुद्ध भारत का संदेश

सुजात आंबेडकर के फेसबुक पोस्ट का केंद्रीय संदेश बाबासाहेब के धम्म परिवर्तन, सामाजिक न्याय और राजनीतिक संघर्ष को एक साथ आगे बढ़ाने का रहा। उन्होंने वंचित समाज के अधिकारों, विद्यार्थियों के साथ कथित भेदभाव और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों को आंबेडकरवादी आंदोलन से जोड़ते हुए युवा पीढ़ी से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उनके संदेश के मुताबिक, बाबासाहेब के सपनों का प्रबुद्ध भारत बनाने के लिए धम्म क्रांति के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की लड़ाई को भी मजबूत करना होगा।

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