Home » युवाओं को चीजें छूने में लग रहा करंट : विटामिन की कमी, लाइफस्टाइल वजह ?

युवाओं को चीजें छूने में लग रहा करंट : विटामिन की कमी, लाइफस्टाइल वजह ?

by Admin
0 comments 31 views

क्या आपको भी ऑफिस में काम करते समय मेटैलिक चीजों को छूते ही हल्का करंट महसूस होता है? अब यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में भी कई लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, पहले लोग इसे सामान्य स्टैटिक शॉक समझकर नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब कुछ मरीजों में यह समस्या बार-बार सामने आ रही है। कुछ मामलों में हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन और हल्की जलन जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। क्यों होता है ऐसा ? क्या है इसके पीछे कारण ? क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?

विटामिन और पोषक तत्वों की कमी (Biological Reason)विटामिन B12 की कमी:

    यह विटामिन हमारी नसों की सुरक्षात्मक परत (माइलिन शीथ) को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। इसकी कमी से नसें कमज़ोर और संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे शरीर में “इलेक्ट्रिक शॉक” जैसी झनझनाहट (मेडिकल भाषा में इसे लर्मिट साइन या न्यूरोपैथी कहते हैं) महसूस होती है।विटामिन D और मैग्नीशियम: इनकी कमी से भी मांसपेशियों में खिंचाव और नसों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

    1. खराब लाइफस्टाइल और डिजिटल आदतें (Lifestyle Reason)लगातार स्क्रीन टाइम: कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के सामने 8 से 12 घंटे लगातार बिताने से शरीर में थकान और न्यूरोलॉजिकल बदलाव आते हैं।नींद की कमी और मानसिक तनाव: रात को देर तक जागने, कम सोने और कॉरपोरेट तनाव के कारण नसों की प्रतिक्रिया प्रभावित होती है।कैफीन का अधिक सेवन: चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का ज़्यादा इस्तेमाल शरीर के नर्वस सिस्टम को ओवर-एक्टिव कर देता है।
    2. स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी (Physical Reason)इलेक्ट्रॉन का असंतुलन: जब हमारे शरीर में सूखेपन के कारण ‘नेगेटिव इलेक्ट्रॉन्स’ जमा हो जाते हैं, तो किसी धातु या अन्य व्यक्ति (पॉजिटिव चार्ज) को छूते ही वे तेजी से ट्रांसफर होते हैं। यही मूवमेंट करंट का झटका देता है।AC का माहौल और सिंथेटिक कपड़े: लगातार एयर कंडीशनर (AC) वाले केबिन में बैठने से हवा की नमी खत्म हो जाती है। इसके अलावा नायलॉन या पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक कपड़े और प्लास्टिक के जूते पहनने से शरीर में स्टेटिक चार्ज और ज़्यादा जमा होता है

    युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या

    KGMU के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.राजेश वर्मा ने बताया कि हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। खासकर कॉरपोरेट सेक्टर, IT कंपनियों और लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वाले युवा इस समस्या के साथ OPD पहुंच रहे हैं।

    डॉ.राजेश वर्मा के अनुसार, यह केवल सामान्य करंट का मामला नहीं होता। कई बार शरीर की नसों, त्वचा की संवेदनशीलता, तनाव, लगातार स्क्रीन पर काम करने, नींद की कमी और मानसिक थकान जैसी स्थितियां भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं। कुछ मरीजों में विटामिन की कमी या न्यूरोलॉजिकल कारण भी सामने आते हैं।

    डॉ. राजेश वर्मा का कहना है कि हर मरीज में कारण अलग-अलग हो सकता है, इसलिए बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है। मरीजों को जरूरी ब्लड टेस्ट, नर्व संबंधी जांच और अन्य पैरामीटर के आधार पर दवाएं दी जा रही हैं।डॉ. राजेश वर्मा का कहना है कि हर मरीज में कारण अलग-अलग हो सकता है, इसलिए बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है। मरीजों को जरूरी ब्लड टेस्ट, नर्व संबंधी जांच और अन्य पैरामीटर के आधार पर दवाएं दी जा रही हैं।

    स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी और शरीर की संवेदनशीलता

    विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार यह समस्या स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी के कारण भी होती है। एयर कंडीशनर वाले वातावरण, सिंथेटिक कपड़ों, लगातार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संपर्क और कम नमी वाले माहौल में शरीर में इलेक्ट्रिक चार्ज जमा हो सकता है। जब व्यक्ति किसी मेटल को छूता है तो हल्का झटका महसूस होता है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह अनुभव बहुत ज्यादा होने लगे या उसके साथ हाथों में दर्द, झनझनाहट, कमजोरी या नसों से जुड़ी अन्य शिकायतें भी हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    तनाव और खराब लाइफस्टाइल भी बड़ी वजह

    KGMU के डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार तनाव में रहना, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी शरीर की नसों और संवेदनशीलता पर असर डालती है। आईटी और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवा अक्सर 8 से 12 घंटे तक लैपटॉप पर काम करते हैं। इससे शरीर में थकान, मांसपेशियों में खिंचाव और न्यूरोलॉजिकल बदलाव देखने को मिलते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि कई युवा कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स का अधिक सेवन करते हैं, जिससे भी शरीर की प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा विटामिन B12 और विटामिन D की कमी भी नसों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकती है।

    इंटरनेट या सोशल मीडिया देखकर खुद से दवा न लें

    “बॉडी में करंट” समझकर बिना जांच इलाज शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है, बार-बार करंट जैसा झटका महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें
    हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट बनी रहे तो डॉक्टर से मिलें. कमजोरी या असहजता महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें.सही जांच के बाद ही इलाज शुरू करें

    बचाव के आसान उपाय

    लाइफस्टाइल में बदलाव

    बॉडी को ग्राउंड करें: काम के बीच-बीच में जूते उतारकर नंगे पैर जमीन पर चलें या अपनी कोहनी/हाथों को दीवार से टच करें ताकि अतिरिक्त चार्ज ग्राउंड (अर्थ) हो जाए।त्वचा को मॉइस्चराइज़ रखें: शरीर में सूखापन न होने दें; पानी भरपूर पीएं और हाथों पर अच्छा मॉइस्चराइज़र लगाएं।कपड़ों का चुनाव: सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती (कॉटन) के कपड़े पहनें।

    खान-पान और मेडिकल सलाहडाइट सुधारें: अपने भोजन में दूध, दही, पनीर, अंडे या हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें ताकि विटामिन B12 की कमी पूरी हो सके。डॉक्टर से मिलें: अगर यह झटका बहुत बार लग रहा है और साथ में हाथों-पैरों में सुन्नपन, कमजोरी या दर्द भी है, तो इसे केवल स्टैटिक करंट न समझें। तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट से मिलकर ब्लड टेस्ट और नर्व संबंधी जांच करवाएं।

    बढ़ती डिजिटल लाइफस्टाइल के बीच नई चुनौती
    विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ इस तरह की समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। पहले जहां यह केवल सामान्य स्टैटिक शॉक माना जाता था, वहीं अब लगातार शिकायतों के चलते लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। KGMU के डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    इससे बचने के लिए समय-समय पर अपने पैर जमीन से टच कराते रहें, ताकि शरीर में जमा इलेक्ट्रॉन चार्ज जमीन में चला जाए। ऐसे में बॉडी चार्ज नहीं होगी, तो आपको करंट का झटका भी महसूस नहीं होगा। अगर पैरों में जूते पहन रखे हों तो कोशिश करें कि थोड़ी-थोड़ी देर में अपनी कोहनी या हाथों को दीवार से टच करते रहें। इससे भी आपको किसी सामान या इंसान से करंट लगने की संभावना कम हो सकती है।

    ये हैं अलर्ट के साइन

    शरीर में विटामिन B12, B6 और B1 की कमी एक वजह हो सकती है
    दिन में कई बार करंट जैसा झटका महसूस होना गंभीर संकेत हो सकता है
    बार-बार झटके लगें तो इसे नजरअंदाज न करें
    देर करने पर समस्या बढ़ सकती है
    ऐसे लक्षण दिखें तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें
    ऐसे रखे खुद को फिट..

    लगातार कई घंटों तक स्क्रीन के सामने न बैठें।
    हर 40-45 मिनट में छोटा ब्रेक लें।
    पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें।
    शरीर में पानी की कमी न होने दें।
    संतुलित आहार लें और विटामिन की जांच कराएं।
    सिंथेटिक कपड़ों की जगह कॉटन कपड़ों का इस्तेमाल करें।
    इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की वायरिंग और अर्थिंग की जांच कराएं।

    You may also like

    Leave a Comment