मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)।उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 14 वर्षीय दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म के संगीन मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी 50 वर्षीय महावीर यादव को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में नामजद दूसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया।
मवेशी चराने गई किशोरी को बनाया था शिकार
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना मैनपुरी जिले के कुरावली थाना क्षेत्र की है। 15 सितंबर 2025 की सुबह लगभग 11 बजे 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 वर्षीय दलित किशोरी अपने मवेशियों को लेकर खेत पर गई थी। इसी दौरान गांव के ही आरोपी महावीर यादव और नवी चंद यादव ने किशोरी को अकेला देखकर उसे घेर लिया और उसके साथ जबरदस्ती की।
आरोपियों ने हैवानियत के दौरान वारदात का वीडियो भी बना लिया और किशोरी को जान से मारने की धमकी दी। साथ ही उसे जातिसूचक शब्द कहते हुए मुंह खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। डर के मारे पीड़िता ने घटना के बारे में तुरंत परिजनों को कुछ नहीं बताया।
वीडियो सामने आने पर दर्ज हुई थी एफआईआर
घटना के दो दिन बाद, 17 सितंबर 2025 को जब पीड़िता की मां ने किशोरी का वीडियो देखा, तब मामले का खुलासा हुआ। पीड़िता की मां तुरंत कुरावली थाने पहुंचीं और नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विवेचना पूरी की और आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।
अदालत ने सुनाया सख्त फैसला
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) जहेंद्र पाल सिंह की अदालत में हुई। अदालत में चले मुकदमे के दौरान सरकारी वकील शैलेंद्री राजपूत ने अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत गवाह और फॉरेंसिक साक्ष्य पेश किए।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद, अदालत ने मुख्य आरोपी महावीर यादव को दोषी माना और उसे आजीवन कारावास तथा 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, सह-आरोपी नवी चंद यादव को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।