बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दातागंज थाना क्षेत्र में 28 वर्षीय राजेश की पुलिस हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जवाब मांगा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि परिजनों के मुताबिक पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी। साथ ही उन्होंने सामने आए सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की।
हालांकि, पुलिस ने मारपीट या यातना के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक राजेश की तबीयत अचानक बिगड़ी और पोस्टमार्टम में कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया है।
भंडारे में विवाद के बाद थाने लाई गई थी दोनों पक्षों की भीड़
पुलिस के अनुसार, बदायूं के अटसेना गांव में सामुदायिक भंडारे के दौरान डीजे पर गाना बदलने को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोगों को दातागंज थाने लाया गया था।
पुलिस के मुताबिक दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति को चोट लगी थी और उसे अस्पताल भेजा गया, जबकि राजेश के खिलाफ शांति भंग करने के आरोप में कार्रवाई की गई थी।
इसके बाद शुक्रवार शाम करीब चार बजे राजेश की थाने में अचानक तबीयत बिगड़ गई। पुलिस का कहना है कि वह शौचालय से लौटने के बाद गिर पड़ा। उसे तत्काल दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में बदायूं जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिवार ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
राजेश के परिवार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि राजेश को पुलिस थाने ले गई थी और हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि अगर उसकी तबीयत पहले से खराब थी तो उसे समय रहते पर्याप्त चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिली।
यही वे सवाल हैं जिन्हें चंद्रशेखर आजाद ने भी अपने बयान में उठाया है। उन्होंने कहा कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की होती है और इसलिए उसकी मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सामने आया सीसीटीवी फुटेज, अलग-अलग दावे
मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार फुटेज में राजेश को थाने में जमीन पर पड़े और बाद में उठकर शौचालय की ओर जाते हुए देखा गया। वापस आने के बाद वह फिर गिरता दिखाई देता है और पुलिसकर्मी उसकी ओर दौड़ते हैं।
एक अन्य सामने आए फुटेज में पुलिसकर्मियों को राजेश को संभालते हुए दिखाया गया है। इसी फुटेज को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसलिए वीडियो के किसी एक हिस्से के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे सीसीटीवी रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से घटनाक्रम की पुष्टि होना महत्वपूर्ण है।
पुलिस का क्या कहना है?
बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा के अनुसार, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की है और उसमें मारपीट या यातना का प्रमाण नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि राजेश के शरीर पर चोट के निशान भी नहीं पाए गए।
चिकित्सकों के मुताबिक राजेश को अस्पताल लाए जाने के समय सांस लेने में परेशानी थी और उसकी हालत गंभीर थी। पुलिस के अनुसार डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम में कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया।
एसएसपी ने यह भी कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
चंद्रशेखर आजाद ने मांगी स्वतंत्र जांच
चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने दातागंज थाने के सभी सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित करने और सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं कराई जानी चाहिए, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच होनी चाहिए।
आजाद ने यह भी सवाल उठाया कि यदि राजेश की मौत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई हत्या के कारण हुई थी, तो घटना के समय वह पुलिस हिरासत में क्यों था? इसी संदर्भ में उन्होंने दूसरे पक्ष के खिलाफ दर्ज हत्या के मुकदमे की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा
राजेश की मौत के बाद पुलिस ने उसके भाई की शिकायत के आधार पर उसके ममेरे भाई रघुवीर और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार यह शिकायत दोनों पक्षों के बीच पहले हुए विवाद से संबंधित है।
यही कार्रवाई अब राजनीतिक विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। चंद्रशेखर आजाद का सवाल है कि जब राजेश पुलिस की हिरासत में था, तब उसकी मौत की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान हुई घटनाओं की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
‘दलित युवक को न्याय मिले’—आजाद की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में कहा कि राजेश कोरी के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि “दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?”
फिलहाल इस मामले में परिवार के आरोप और पुलिस के दावे अलग-अलग हैं। पोस्टमार्टम में कार्डियक अरेस्ट बताए जाने के बावजूद हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने की पूरी परिस्थितियों पर सवाल बने हुए हैं। ऐसे में पूरे सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वतंत्र जांच से ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।