चंडीगढ़: निठारी कांड का नाम सामने आते ही नोएडा की डी-5 कोठी, लापता बच्चों और 2006 में मिले मानव अवशेषों की भयावह कहानी सामने आती है। लेकिन इस मामले का एक दूसरा पहलू भी रहा—आरोपी बनाए गए मोनिंदर सिंह पंढेर के परिवार पर पड़ा सामाजिक और निजी दबाव।
पंढेर की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी देविंदर कौर और बेटे करनदीप सिंह पंढेर चंडीगढ़ में अपने घर में रहे। परिवार ने वर्षों तक सार्वजनिक चर्चा से दूरी बनाए रखी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार का संबंध मूल रूप से लुधियाना से है और चंडीगढ़ में उनका घर सेक्टर-27 में बताया गया था। 2023 में पंढेर की रिहाई के बाद भी पत्नी और बेटे की मौजूदगी वहीं दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी के बाद बेटे ने किया था पिता का बचाव
दिसंबर 2006 में पंढेर की गिरफ्तारी के बाद उनका परिवार अचानक राष्ट्रीय मीडिया की निगाहों में आ गया था। जनवरी 2007 में उनके बेटे करनदीप सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपने पिता का बचाव किया था।
उस समय उन्होंने कहा था कि उनके पिता बच्चों से प्यार करते हैं और वे इस तरह का अपराध नहीं कर सकते। उन्होंने जांच और कथित स्वीकारोक्ति पर भी सवाल उठाए थे तथा न्यायपालिका पर भरोसा जताया था।
करनदीप ने यह भी बताया था कि परिवार के लिए हालात बेहद कठिन हो गए थे। उनके अनुसार लोग परिवार से संबंध रखने से कतराने लगे थे और चंडीगढ़ स्थित घर के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी तक हुई थी। उन्होंने कहा था कि परिवार खुद को इस मामले के कारण आघात में महसूस कर रहा था।
पत्नी देविंदर कौर ने सार्वजनिक जीवन से बनाई दूरी
निठारी कांड के दौरान पंढेर की पत्नी और बेटा चंडीगढ़ में रहते थे। 2007 की रिपोर्टों में बताया गया था कि देविंदर कौर अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए चंडीगढ़ लौट आई थीं।
पंढेर नोएडा की डी-5 कोठी में रहते थे, जबकि उनका परिवार चंडीगढ़ में था। इस वजह से परिवार की जिंदगी दो शहरों के बीच बंटी हुई थी।
मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने के बाद देविंदर कौर ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। बाद की रिपोर्टों में भी उनके सार्वजनिक बयानों का उल्लेख बहुत कम मिलता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनकी वर्तमान निजी जिंदगी के बारे में इससे आगे कोई पुख्ता निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
2023: जब अदालत से मिली बड़ी राहत
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े मामलों में पंढेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों को दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना।
फैसले के बाद पंढेर के बेटे करन सिंह पंढेर ने कहा था कि परिवार को भारतीय न्याय व्यवस्था पर भरोसा था और उसने कानूनी प्रक्रिया के जरिए लड़ाई लड़ी। उस समय परिवार के सदस्य, जिनमें पंढेर की पत्नी देविंदर कौर भी शामिल थीं, चंडीगढ़ स्थित घर पर मौजूद थे।
करन ने यह भी बताया था कि उनके पिता को चंडीगढ़ की जेल में स्थानांतरित करने से संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी, लेकिन हाईकोर्ट से बरी होने के बाद उन्हें लगा कि वह याचिका अब अप्रासंगिक हो गई है।
रिहाई के बाद पंढेर परिवार के पास लौटे
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद पंढेर जेल से बाहर आए और परिवार के साथ चंडीगढ़ चले गए। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से बहुत कम बातचीत की।
नवंबर 2025 में पंढेर ने एक टीवी इंटरव्यू में निठारी मामले की जांच और अपने खिलाफ लगे आरोपों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने जांच में कई कमियों का आरोप लगाया और कहा कि मामले को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उसमें कई सवाल अनुत्तरित हैं। ये उनके स्वयं के दावे हैं; उन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बेटे की जिंदगी पर पड़ा सबसे बड़ा असर: पहचान के साथ जुड़ गया निठारी कांड
पंढेर के बेटे करनदीप/करन सिंह ने 2007 में कहा था कि उनके परिवार की सामान्य जिंदगी लगभग रुक गई थी। परिवार को सामाजिक दूरी और सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ रहा था।
यह स्थिति इस बात को भी दिखाती है कि किसी हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति के परिवार को भी उसके सामाजिक और मानसिक प्रभावों से गुजरना पड़ सकता है—भले ही परिवार के सदस्यों पर स्वयं कोई आरोप न हो।
हालांकि, करनदीप के बारे में 2023 की रिपोर्ट बताती है कि वह चंडीगढ़ में था और परिवार की ओर से अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया दे रहा था। उसके बाद उसकी निजी जिंदगी के बारे में विश्वसनीय सार्वजनिक रिपोर्टें बहुत सीमित हैं।
आज परिवार कहां है?
सितंबर 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में पंढेर की पत्नी देविंदर कौर और बेटे की सटीक वर्तमान लोकेशन, पेशे या रोजमर्रा की जिंदगी की स्वतंत्र और ताजा पुष्टि नहीं मिलती।
इतना जरूर सार्वजनिक रिकॉर्ड से सामने आता है कि परिवार का चंडीगढ़ से पुराना संबंध है। 2023 में भी पंढेर की पत्नी और बेटा चंडीगढ़ स्थित पारिवारिक घर में मौजूद थे। परिवार मूल रूप से लुधियाना से बताया गया है।
इसलिए यह कहना कि परिवार आज भी निश्चित रूप से उसी घर में रह रहा है, उपलब्ध प्रमाणों से आगे बढ़कर दावा करना होगा।
निठारी की कहानी का एक अनसुलझा सामाजिक पहलू
निठारी कांड में अदालतों की बाद की कार्यवाही ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। 2023 में पंढेर और कोली को राहत मिली और 2025 में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद निठारी से जुड़े मामलों में दोनों के खिलाफ दोषसिद्धियां कायम नहीं रहीं।
लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह कहानी अलग रही। 2025 में कोली की अंतिम मामले में रिहाई के बाद निठारी के पीड़ित परिवारों की निराशा पर रिपोर्टें सामने आईं।
इस पूरे घटनाक्रम में पंढेर के परिवार की कहानी एक अलग सवाल सामने लाती है—जब किसी व्यक्ति पर देश को झकझोर देने वाले अपराध का आरोप लगता है, तो उसके परिवार के उन सदस्यों की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है जिन पर खुद कोई आरोप नहीं होता?
पंढेर के परिवार ने लगभग दो दशक तक इसी सामाजिक और सार्वजनिक छाया के बीच जीवन बिताया। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से इतना जरूर पता चलता है कि परिवार ने कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा और लंबे समय तक मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनकी वर्तमान निजी जिंदगी के बारे में इससे आगे की जानकारी सार्वजनिक रूप से पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है।