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गहरी नींद में सोने की प्रतियोगिता…..नदी के किनारे घंटों सोते रहे सैकड़ों लोग !

by Admin
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कई बार हम भागदौड़ की जिंदगी और जिम्मेदारियों के बीच पूरी नींद भी नहीं ले पाते हैं. ऐसे में अगर आपको सिर्फ सोने के लिए कहीं बुलाया जाए, तो आप फटाफट वहां पहुंचना चाहेंगे. कुछ ऐसा ही हुआ साउथ कोरिया की राजधानी सोल में, जहां बहुत से लोग सिर्फ सोने के लिए एक जगह पर इकट्ठा हुए.

दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब हान नदी के किनारे लोगों ने नींद को एक प्रतियोगिता बना दिया. योउइदो हांगांग पार्क में आयोजित इस अनोखे पावर नैप कॉन्टेस्ट में करीब 170 लोग शामिल हुए, लेकिन यहां दौड़ नहीं, बल्कि गहरी नींद जीतने की चुनौती थी. सोल मेट्रोपॉलिटन सरकार की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम अब अपने तीसरे साल में पहुंच चुका है. रॉयटर्स के मुताबिक इसका मकसद एक गंभीर समस्या यानि नींद की कमी को उजागर करना है, जो दक्षिण कोरिया जैसे तेज-रफ्तार समाज में आम होती जा रही है.

प्रतिभागियों को उनकी व्यक्तिगत कहानियों के आधार पर आवेदन प्रक्रिया के जरिए चुना गया था. इस प्रतियोगिता में उन्हें किसी शारीरिक खेल में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगह पर गहरी नींद में जाने की क्षमता के आधार पर मुकाबला करना था. प्रतियोगियों का मूल्यांकन नींद पर ध्यान के आधार पर किया गया, यानी वे कितनी देर तक सोए रह सकते हैं. आयोजकों ने उनकी नींद को मापने के लिए खास उपकरणों का इस्तेमाल किया.

क्या हैं प्रतियोगिता के नियम?
दोपहर के 3 बजे, जब आमतौर पर शहर जागता है, यहां लोग सोने की तैयारी में थे. बिस्तर सज चुके थे, आंखें बंद थीं, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होने वाली थी. प्रतियोगियों को सिर्फ सोना नहीं था, उन्हें हर हाल में सोते रहना था. आयोजकों ने माहौल को मुश्किल बनाने के लिए अजीबोगरीब बाधाएं खड़ी कीं, कहीं पंख से गुदगुदी, तो कहीं मच्छरों की भनभनाहट की आवाज. यह सिर्फ एक मजाकिया खेल नहीं था, बल्कि तकनीक की नजर भी हर पल उन पर थी. खास उपकरणों से उनकी नींद की गहराई और गुणवत्ता को मापा गया. जो सबसे गहरी और लगातार नींद में रहा, वही विजेता बना. इस भीड़ में एक चेहरा खास था- पार्क जुन सोक, जो 20 साल का छात्र था. उसकी आंखों के नीचे काले घेरे बता रहे थे कि परीक्षाओं और पार्ट-टाइम नौकरी के बीच वो रोज सिर्फ 3-4 घंटे ही सो पाता था. ऐसे में इस जगह पर वो अपनी नींद पूरी करने के लिए आया था.

कौन-कौन हुआ इसमें शामिल?
इस प्रतियोगिता में ऑफिस कर्मचारी, डॉक्टर, और यहां तक कि कपल्स भी शामिल हुए. हर किसी की अपनी थकान की कहानी थी. कोई काम के बोझ से टूटा था, तो कोई रोजमर्रा के तनाव से. यह दृश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं था बल्कि इस बात का एक आईना था, जो दिखा रहा था कि आधुनिक जीवन की रफ्तार ने इंसानों से उनकी नींद छीन ली है. शायद यही वजह है कि अब सोना भी एक कला बन चुका है और एक मुकाबला भी.

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