खड़गे ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक छात्रों की मांगों और विरोध प्रदर्शनों को नजरअंदाज किया। उनका आरोप था कि जब देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ और सार्वजनिक दबाव बढ़ा, तब सरकार को कदम उठाने पड़े। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों से संवाद किया होता तो प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की नौबत नहीं आती।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में करीब सवा लाख छात्रों ने आत्महत्या की, जो देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
खड़गे ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक छात्रों की मांगों और विरोध प्रदर्शनों को नजरअंदाज किया। उनका आरोप था कि जब देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हुआ और सार्वजनिक दबाव बढ़ा, तब सरकार को कदम उठाने पड़े। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों से संवाद किया होता तो प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की नौबत नहीं आती।
“बिल में सिर्फ आंकड़े बदले, व्यवस्था नहीं”
राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान खड़गे ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया संशोधन बिल कोई बड़ा सुधार नहीं है। उनके अनुसार, इसमें केवल कुछ प्रावधानों और आंकड़ों में बदलाव किया गया है, जबकि परीक्षा प्रणाली की मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि केवल दंड और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। “पेपर चुराने वाले बचते रहेंगे और छात्र परेशान होते रहेंगे,” उन्होंने आरोप लगाया।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में यह संशोधन विधेयक पेश किया। उल्लेखनीय है कि लोकसभा ने बुधवार को लगभग सात घंटे चली चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया था।
खड़गे के भाषण की प्रमुख बातें
- सरकार दबाव में झुकी
खड़गे ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और संशोधन बिल छात्रों के हित में नहीं, बल्कि छात्रों के आंदोलन और जनदबाव के कारण सरकार की मजबूरी का परिणाम है। - सिर्फ सजा बढ़ाने से समाधान नहीं
उन्होंने कहा कि जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करना, सख्त सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना जरूरी है। - 152 परीक्षाओं में पेपर लीक का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी बड़े दोषी को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय वैचारिक आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं। - छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से जवाब मांगा
खड़गे ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री अमित शाह इस कार्रवाई पर जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। - नए सिलेबस पर भी उठाए सवाल
खड़गे ने नए पाठ्यक्रम में शामिल कुछ संदर्भों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनमें शूद्रों से जुड़े ऐसे वर्णन शामिल हैं, जिनमें वेदपाठ सुनने या बोलने पर कठोर दंड का जिक्र है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच को शिक्षा व्यवस्था में स्थान नहीं मिलना चाहिए। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और सदन में हंगामा हुआ।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकार के अनुसार, नए प्रावधानों के तहत दोषियों पर अधिक कड़ी कार्रवाई, भारी आर्थिक दंड और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया की व्यवस्था की गई है, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होगी।