14 अक्टूबर 2026 से 11 अप्रैल 2027 तक महाराष्ट्रभर में निकलेगी ‘शिक्षण क्रांति यात्रा’, गांव से जिला स्तर तक होंगी शिक्षण क्रांति परिषदें
महाराष्ट्र। महात्मा ज्योतिराव फुले की द्विशताब्दी जयंती के अवसर पर आंबेडकरवादी मिशन ने वर्ष 2026-27 को ‘शिक्षण क्रांति वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। मिशन के प्रमुख दीपक कदम ने यह घोषणा करते हुए बताया कि इस अभियान के तहत 14 अक्टूबर 2026 से 11 अप्रैल 2027 तक महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में ‘शिक्षण क्रांति यात्रा’ निकाली जाएगी। इसके साथ ही गांव, तालुका और जिला स्तर पर शिक्षण क्रांति परिषदों का आयोजन किया जाएगा।
आंबेडकरवादी मिशन के अनुसार, इस पूरे अभियान का उद्देश्य समाज में शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना, विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा की दिशा पर व्यापक सामाजिक संवाद खड़ा करना है।
शिक्षा की भावी दिशा पर पेश की जाएगी ‘ब्लू प्रिंट’
अभियान के दौरान आयोजित होने वाली शिक्षण क्रांति परिषदों में शिक्षा की भावी राजनीति और दिशा को लेकर एक ‘ब्लू प्रिंट’ प्रस्तुत करने की बात कही गई है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच शिक्षा की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
मिशन का कहना है कि केवल विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज तक पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें गुणवत्तापूर्ण और भविष्य के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
गरीब और साधनविहीन वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर जोर
आंबेडकरवादी मिशन ने शिक्षा से जुड़े सामाजिक असमानता के मुद्दे को भी अभियान का प्रमुख विषय बनाया है। मिशन के अनुसार, समाज का गरीब और साधनविहीन वर्ग आज भी अनेक कारणों से शिक्षा से वंचित रह जाता है। आर्थिक कठिनाइयों, संसाधनों की कमी और उचित मार्गदर्शन का अभाव बच्चों की शिक्षा के रास्ते में बाधा बन सकता है।
वहीं, मिशन ने यह भी चिंता जताई है कि समाज के कुछ ऐसे परिवार, जहां शिक्षा का स्तर पहले की तुलना में बेहतर हुआ है, वहां भी नई पीढ़ी में शिक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। विद्यार्थियों का पढ़ाई के प्रति उदासीन होना एक महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है।
तीसरी पीढ़ी में शिक्षा के प्रति घटती गंभीरता चिंता का विषय
दीपक कदम के अनुसार, समाज की तीसरी पीढ़ी में शिक्षा के महत्व को लेकर गंभीरता कम होना चिंता का विषय है। उनका मानना है कि पिछली पीढ़ियों ने जिन सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों के बीच शिक्षा हासिल की, उनकी तुलना में आज कई विद्यार्थियों के पास अधिक संसाधन और अवसर मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि शिक्षा के प्रति रुचि और गंभीरता कम होती है, तो इस पर सामाजिक स्तर पर चर्चा और मार्गदर्शन जरूरी है।
इसी उद्देश्य से शिक्षण क्रांति यात्रा के दौरान विद्यार्थियों, अभिभावकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने तथा शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा करने की योजना है।
गांव से जिला स्तर तक होंगे कार्यक्रम
आंबेडकरवादी मिशन की योजना के अनुसार अभियान को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। गांव, तालुका और जिला स्तर पर शिक्षण क्रांति परिषदों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा, प्रबोधनात्मक कार्यक्रम और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने वाली गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
मिशन का उद्देश्य शिक्षा के सवाल को सामाजिक आंदोलन के रूप में सामने लाना और विभिन्न वर्गों को इसमें सहभागी बनाना है।
14 अक्टूबर से शुरू होगा अभियान
‘शिक्षण क्रांति वर्ष’ के तहत प्रस्तावित अभियान की शुरुआत 14 अक्टूबर 2026 से होगी और यह कार्यक्रम 11 अप्रैल 2027, यानी महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती तक चलाया जाएगा।
इस दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में शिक्षण क्रांति यात्रा के साथ-साथ परिषदों और अन्य जनजागरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मिशन के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा के अधिकार, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य जैसे मुद्दों पर समाज में व्यापक चर्चा खड़ी करने का प्रयास किया जाएगा।
फुले की शिक्षा क्रांति की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया था। विशेष रूप से वंचित और महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य को महाराष्ट्र के सामाजिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।
आंबेडकरवादी मिशन ने फुले की द्विशताब्दी जयंती को केवल स्मरण और समारोह तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा के सवाल को केंद्र में रखकर सामाजिक जागरूकता का अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
मिशन के मुताबिक, ‘शिक्षण क्रांति वर्ष’ के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज को शिक्षा की वैश्विक दिशा से जोड़ने, नई पीढ़ी में पढ़ाई के प्रति गंभीरता पैदा करने तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
14 अक्टूबर से शुरू होने वाली शिक्षण क्रांति यात्रा के जरिए अब महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षा को लेकर किस तरह का सामाजिक संवाद खड़ा होता है, यह अभियान का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।