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पाप और पुण्य सभी कर्मों का फल सब को भुगतना पड़ता है।

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“भगवान ! परिनिवृत होऊंगा।”- मोग्गल्लान

भगवान ने पूछा-” परिनिवृत? मोग्गल्लान !” ” हां भगवा।”

“किस स्थान पर? “काल-शिला प्रदेश में।”

(वर्तमान राजगृह, बिहार में यह स्थान स्थित है)

शास्ता ने अच्छा कह उन्हें अनुमति प्रदान की।

तथागत के अग्रशिष्य महामोग्गल्लान ध्यान प्रविण और कुशाग्र बुद्धि थे। वे रिद्धि सिद्धि प्राप्त थे। फिर भी उनकी हत्या हुई थी। निगन्ठों ने उनकी हत्या करने के लिए पेशेवर हत्यारे को भेजा और राजगीर के समीप इसिगिल पर्वत पर कालशिला पर हत्या का अंजाम दिया।

चाहते तो महामोग्गल्लान ऋद्धि बल से अपनी रक्षा कर सकते थे। लेकिन उनको प्रतिभास हो गया था कि उनका समय आ गया है, कर्म का फल भोगना ही पड़ेगा । इसलिए उन्होंने अपनी रक्षा का प्रयास छोड़ दिया। और हत्यारों ने उनकी हत्या कर दी।

भिक्खुओं को यह बात समझने में नहीं आई कि महामोग्गल्लान जैसे ऋद्धिमान की ऐसे मृत्यु क्यों हुई?

भगवान ने इस बात को जाना तब भिक्खुओं को कहा-

“भिक्खुओं ! तुम यह सोचते हो कि मोग्गल्लान जैसे प्रवर,थेर भिक्खु की इस तरह मृत्यु कैसे हो गईं?

भिक्खुओं ! मोग्गल्लान ने इस जीवन में बड़ा पवित्र जीवन जीया है। उनके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था। परंतु उसे पाप कर्म का फल भुगतान करना पडा है। अपने निरपराधी माता पिता की हत्या के फल स्वरूप उनकी ऐसी मौत हुई है।

भगवान ने कहा- जो व्यक्ति दण्ड के अयोग्य और निरपराधी व्यक्ति के प्रति द्वेष करता है,वह शीघ्र ही दस स्थितियों में से किसी एक को प्राप्त होता है।

गाथा में बुद्ध ने कहा-

” यो दण्डेन अदण्डेसु

अप्पदुट्ठेसु दुस्सति।

दसन्नमञ्ञतरं ठानं,

खिप्पमेव निगच्छति।।”

जो अदण्डनीय को दण्ड से पीड़ित करता है, निर्दोष को दोष लगता है,वह शीघ्र ही इन दस बातों में से एक को प्राप्त होता है।

“वेदनं फरूसं जानिं,

सरीरस्स च भेदनं।

गरुकं वापि आबाधं,

चित्तक्खेपं व पापुणे।।”

कड़ी वेदना. हानि, अंग का भंग होना, भारी रोग से ग्रस्त होना, पागलपन होना।

“राजतो वा उपस्सग्गं,

अब्भक्खानं व दारूणं।

परिक्खयं व ञातीनं,

भोगानं व पभंगुरं।।”

राजा से दण्डित किया जाता है,भयानक निंदा के पात्र होता है,जाति बन्धुओं का विनाश हो जाता है,

या भोगों का क्षय हो जाता है।

“अथ वस्स अगारानि,

अग्गी डहती पावको।

कायस्स भेदा दुप्पञ्ञो,

निरयं सो’पपज्जति।।

या उसके घर में आग लग जाती है जिसके कारण सब कुछ भस्म हो जाता है। काया छोड़ने पर वह दुर्गति को प्राप्त हो जाता है।”

“भिक्खुओं! अपने पूर्व जन्म में मोग्गल्लान ने अपने माता-पिता को पीट-पीट कर मार दिया था, उन्हीं कर्मों की निष्पत्ति इस जन्म में हुई है।”

कर्मों का फल सब को भुगतना पड़ता है। नमो बुद्धाय

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