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नेपाल चुनाव- बालेन शाह की पार्टी RSP 107 सीटों पर आगे, बन सकते पहले बुद्धिस्ट PM

by aman
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नेपाल में 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव की मतगणना तेजी से जारी है, जो देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। यह चुनाव पिछले साल सितंबर 2025 में हुए हिंसक युवा-आंदोलन (जेन-जी प्रोटेस्ट) के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसमें भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया था। चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 60% वोटर टर्नआउट रहा, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम है, लेकिन युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कुल 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा के लिए 165 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव हुए, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से भरी जाएंगी। मतगणना 3-4 दिनों तक चलने की उम्मीद है, और चुनाव आयोग ने 9 मार्च तक पूरी प्रक्रिया समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। शुरुआती परिणाम शुक्रवार से आने शुरू हो सकते हैं।

शुरुआती रुझान और अपडेटेड परिणाम

165 में से 150 से अधिक सीटों पर रुझान आ चुके हैं, और परिणाम युवा-केंद्रित पार्टियों के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), जो 2022 में गठित हुई थी, ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा (138 सीटें) पार कर लिया है, और यह 47 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 1 सीट पहले ही जीत चुकी है। RSP की यह सफलता जेन-जी आंदोलन की सीधी देन मानी जा रही है, जहां युवाओं ने भ्रष्टाचार, गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई थी। पार्टी के प्रमुख चेहरे बालेंद्र शाह (बालेन शाह) अब प्रधानमंत्री बनने के करीब पहुंच चुके हैं, और उनकी पार्टी को “क्लीन स्वीप” की स्थिति में देखा जा रहा है।

Kathmandu Mayor Balen Shah | X

अन्य प्रमुख पार्टियों का प्रदर्शन:

  • नेपाली कांग्रेस: गगन थापा के नेतृत्व वाली यह पार्टी सिर्फ 1 सीट जीत पाई है और 10 सीटों पर आगे है। युवा वोटर्स की नाराजगी के कारण पार्टी डबल-डिजिट में सिमटती दिख रही है, हालांकि थापा ने कहा है कि वे जेन-जी की मांगों को सुन रहे हैं।
  • कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (UML): केपी शर्मा ओली की पार्टी 11 सीटों पर आगे है। ओली खुद झापा-5 सीट से बालेन शाह के खिलाफ 5,261 वोटों से पीछे चल रहे हैं, जबकि उन्होंने 2017 और 2022 में इसी सीट से जीत हासिल की थी। ओली ने चुनाव से पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में जीत का दावा किया था, लेकिन रुझान उनके खिलाफ हैं।
  • अन्य पार्टियां जैसे सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) और जनता समाजवादी पार्टी भी पीछे चल रही हैं, लेकिन RSP की लहर में उनका प्रदर्शन फीका पड़ गया है।

बालेन शाह: रैपर से मेयर और अब पीएम बनने के करीब

बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से जाना जाता है, नेपाल की राजनीति में एक नई हवा लेकर आए हैं। 2022 से पहले वे अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन के स्टार थे, जहां उनके गाने गरीबी, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार पर केंद्रित होते थे। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उन्होंने मई 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू मेयर का चुनाव जीता, जो नेपाल के इतिहास में पहली बार हुआ। काठमांडू मेयर की हैसियत कई केंद्रीय मंत्रियों से ऊपर मानी जाती है, और उनकी जीत ने वैश्विक ध्यान खींचा। 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी प्रकाशित की।

RSP के साथ जुड़कर बालेन ने युवा आंदोलन को राजनीतिक ताकत दी। चुनाव प्रचार में वे काले ब्लेजर, जींस और धूप के चश्मे में नजर आते थे, जो युवाओं को आकर्षित करता था। अब झापा-5 से ओली को पीछे छोड़कर वे पीएम पद के प्रमुख दावेदार बन चुके हैं। उनकी पार्टी की सफलता नेपाल में “ओल्ड गार्ड” (पुरानी पीढ़ी के नेता) बनाम “यंग मूवमेंट” की लड़ाई का प्रतीक है।

चुनाव का पृष्ठभूमि और महत्व

चुनाव पिछले साल सितंबर 2025 के हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुआ, जिसमें 77 लोगों की मौत हुई और सरकार गिर गई। अंतरिम सरकार पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी, और चुनाव 12 सितंबर 2025 को घोषित किया गया। करीब 1.89 करोड़ वोटर्स में से 1 करोड़ युवा वोटर्स नए जोड़े गए, जो ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) जैसे मुद्दों से प्रभावित हैं। यह चुनाव नेपाल की लोकतंत्र को मजबूत करने का मौका है, लेकिन कम टर्नआउट चिंता का विषय है।

अंतिम परिणाम आने तक स्थिति बदल सकती है, लेकिन RSP की लीड नेपाल में एक नए युग की शुरुआत कर सकती है, जहां युवा नेता पारंपरिक दलों को चुनौती दे रहे हैं। अधिक अपडेट्स के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें।

पहला बौद्ध PM
बालेन शाह बौद्ध परिवार से हैं (नेवार/मैथिल मधेसी मूल) और बौद्ध धर्म मानते हैं। नेपाल में अब तक कोई बौद्ध PM नहीं रहा—अधिकांश हिंदू/सवर्ण जातियों से रहे है।

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