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आप सांसदों का भाजप में विलय आधिकारिक तौर पर स्वीकार , राज्यसभा में बदल गया नंबर गेम, NDA को बंपर फायदा

by Admin
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राघव चड्ढा ने राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़ा दी है. अब एनडीए बहुमत के जादुई आंकड़े से चंद कदम की दूरी पर खड़ा है. राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को सोमवार को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया.

राघव चड्ढा ने भाजपा को उस खुशखबरी के और करीब ला दिया है, जिसका इंतजार उसे सालों से है. जी हां, राघव चड्ढा के एक फैसले ने भाजपा और एनडीए की ताकत में इजाफा कर दिया है. राज्यसभा में एनडीए की संख्या बढ़कर 148 हो गई है. इसका मतलब है कि एनडीए अब दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच चुका है. अब वह बहुमत के आंकड़े से महज कुछ कदम की दूरी पर है. जी हां, राघव चड्ढा के साथ अन्य 6 आप सांसद भाजपाई हो चुके हैं. राज्यसभा में भाजपा सांसदों की लिस्ट में राघव चड्ढा समेत सातों सांसदों का नाम आधिकारिक तौर पर जुड़ गया है.

दरअसल, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी. इससे एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ताकत बढ़कर 148 हो गई है, जिसमें सात नामित सांसद भी शामिल हैं. वहीं, उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सदस्यों की संख्या 10 से घटकर तीन रह गई. इस बीच किरेन रिजिजू ने सभी सात सांसदों का भाजपा में स्वागत किया.

भाजपा के अब राज्यसभा में कितने सांसद?
भाजपा में विलय के बाद राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता अब भाजपा के 113 राज्यसभा सांसदों में शामिल हो गए हैं. आम आदमी पार्टी के इन सातों सांसदों ने पिछले हफ्ते पार्टी छोड़ दी थी. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन सात सांसदों ने कभी भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया और न ही कोई अनुशासनहीनता या असंसदीय आचरण किया है.

किस आधार पर भाजपा में विलय
ये सात आप सांसद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई से भी अधिक हैं और दसवीं अनुसूची के तहत भाजपा में विलय हुए हैं. जिससे वे दलबदल विरोधी कानून के तहत अपनी सदस्यता बनाए रखने में सफल रहे. 7 आप सांसदों के भाजपा में विलय पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि वे जनता की समस्याएं उठाएंगे.राघव चड्ढा ने कहा, ‘कुछ लोग मुझसे मेरे फैसले के पीछे की वजह पूछ रहे हैं. मैं राजनीति में अपना करियर बनाने नहीं, बल्कि अपना करियर छोड़कर आया था. अब AAP उन लोगों के हाथ में चली गई है, जो अपने निजी स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं. हम कुल 7 सांसदों ने इस राजनीतिक पार्टी को छोड़ने का फैसला किया… मैं आपकी सभी समस्याओं को और भी ज्यादा मेहनत से उठाऊंगा और उनके समाधान पर भी काम करूंगा.’

भाजपा की संख्या बढ़ी, एनडीए दो-तिहाई बहुमत के करीब
इधर भाजपा भी अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश में है, क्योंकि इस साल के अंत में 30 से ज्यादा सीटें खाली होने वाली हैं. सत्तारूढ़ पार्टी कम से कम पांच अतिरिक्त सीटें जोड़ सकती है. इससे एनडीए की ताकत महत्वपूर्ण दो-तिहाई बहुमत यानी 163 के करीब पहुंच सकती है.
बहरहाल, दो-तिहाई बहुमत अब तक एनडीए के लिए दूर की बात रही है. इससे संविधान संशोधन जैसे मुद्दों पर उसे दिक्कतें आती रही हैं. हाल ही में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों के मामले में भी यही हुआ.

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