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न्याय के लिए अब सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे केजरीवाल और मनीष सिसोदिया, राजघाट पर पहुँच कर महात्मा गांधी को किया नमन

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता को एक चिट्ठी लिखी है. इससे पहले केजरीवाल ने ऐसी ही एक चिट्ठूी लिखी थी, जिसमें उन्होंने कानूनी कार्यवाही पर चिंता जताई थी.

अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि न्याय निष्पक्ष होना चाहिए , और बेहद दुःख के साथ यह कहना पड रहा है कि आज हमें अपनी न्यायपालिका से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कम ही नजर आती है। उन्होंने आगे कहा कि आज मनीष जी और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुँच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

मनीष सिसोदिया का भी बड़ा फैसला, चिट्ठी में लिखा….

सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथ में है. ऐसे में, मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि आबकारी नीति मामले में कोई वकील उनकी तरफ से पेश नहीं होगा और उन्हें न्याय का भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अब उनके पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथ में है. ऐसे में, मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है. मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है.’

अरविंद केजरीवाल ने भी लिखी जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी थी चिट्ठी

इससे पहले केजरीवाल ने ऐसी ही एक चिट्ठूी लिखी थी, जिसमें उन्होंने कानूनी कार्यवाही पर चिंता जताई थी. उन्होंने चिट्ठी में लिखा था कि जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है. इसलिए, उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करने का निर्णय लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लिखा था कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है और उन्हें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है.

मामला क्या है?

यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति 2021-22 से जुड़ा है. इस मामले में पूर्व सरकार पर शराब नीति में अनियमितताएं करने और कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों एजेंसियां कर रही हैं. इस मामले में केजरीवाल और सिसौदिया दोनों आरोपी हैं, लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

इस आदेश को CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. अब यह मामला हाई कोर्ट में है, लेकिन केजरीवाल ने चिट्ठी लिखकर मांग की है कि वो कार्यवाही में तभी शामिल होंगे जब इस मामले की सुनवाई से जस्टिस शर्मा को हटाया जायेगा. इसी चिट्ठी ने अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है.

सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथ में है. ऐसे में, मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि आबकारी नीति मामले में कोई वकील उनकी तरफ से पेश नहीं होगा और उन्हें न्याय का भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अब उनके पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथ में है. ऐसे में, मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है. मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है.’

अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी थी चिट्ठी

इससे पहले केजरीवाल ने ऐसी ही एक चिट्ठूी लिखी थी, जिसमें उन्होंने कानूनी कार्यवाही पर चिंता जताई थी. उन्होंने चिट्ठी में लिखा था कि जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है. इसलिए, उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करने का निर्णय लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लिखा था कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है और उन्हें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है.

मामला क्या है?

यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति 2021-22 से जुड़ा है. इस मामले में पूर्व सरकार पर शराब नीति में अनियमितताएं करने और कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों एजेंसियां कर रही हैं. इस मामले में केजरीवाल और सिसौदिया दोनों आरोपी हैं, लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

इस आदेश को CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. अब यह मामला हाई कोर्ट में है, लेकिन केजरीवाल ने चिट्ठी लिखकर मांग की है कि वो कार्यवाही में तभी शामिल होंगे जब इस मामले की सुनवाई से जस्टिस शर्मा को हटाया जायेगा. इसी चिट्ठी ने अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है.

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