यवतमाल: महाराष्ट्र के यवतमाल में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आवंटित फंड के इस्तेमाल को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया। VBA की ओर से जारी सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने आदिवासी मंत्री अशोक उइके के आवास की ओर मार्च निकाला और सरकार से SC-ST समुदाय के लिए निर्धारित धनराशि के इस्तेमाल का हिसाब देने की मांग की।
VBA ने आरोप लगाया है कि ₹3,594.03 करोड़ के SC फंड और ₹1,007.10 करोड़ के ST फंड में कथित तौर पर अनियमितता हुई है। पार्टी ने इसे SC-ST समुदाय के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए मंत्री अशोक उइके के आवास पर विरोध मार्च निकाला।
हालांकि, इन दोनों रकम को ‘लूटा गया’ या किसी व्यक्ति द्वारा गबन किए जाने के VBA के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इन आंकड़ों को फिलहाल VBA के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
फंड के इस्तेमाल पर उठे सवाल
VBA का मुख्य सवाल यह है कि SC और ST समुदाय के विकास के लिए निर्धारित बजटीय प्रावधानों का इस्तेमाल किन योजनाओं में किया गया और क्या पूरी राशि निर्धारित उद्देश्यों पर खर्च हुई। पार्टी ने सरकार से फंड के आवंटन, वितरण और वास्तविक खर्च का सार्वजनिक हिसाब देने की मांग की है।
वित्तीय आंकड़ों के संदर्भ में सरकारी दस्तावेजों में महाराष्ट्र के लिए अलग-अलग मदों में बड़ी रकम का प्रावधान और खर्च दर्ज होता है। उदाहरण के तौर पर, केंद्र सरकार के एक संसदीय दस्तावेज में महाराष्ट्र को 2022-23 से 2024-25 के बीच आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में कुल ₹10,788.40 करोड़ जारी किए जाने का उल्लेख है। यह आंकड़ा SC-ST फंड से संबंधित नहीं है, इसलिए इसे VBA के मौजूदा आरोप का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक रूप से अहम मुद्दा
SC-ST बजट के इस्तेमाल का सवाल महाराष्ट्र की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए निर्धारित धनराशि का उद्देश्य इन समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं को वित्तीय सहायता देना है। ऐसे में यदि निर्धारित फंड को दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगता है, तो उसके आवंटन और खर्च का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
यवतमाल के प्रदर्शन के जरिए VBA ने इसी मुद्दे को सरकार के सामने उठाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग VBA द्वारा बताए गए ₹3,594.03 करोड़ और ₹1,007.10 करोड़ के आंकड़ों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हैं और इन रकम का वास्तविक बजटीय संदर्भ क्या है।