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स्वतंत्रता दिवस पर अपने गांव पहुंचे अभिजीत दिपके, फहराया तिरंगा; सरकारी स्कूल की बदहाली पर छलका दर्द

by Admin
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अभिजीत दिपके ने कहा- ध्वजारोहण का गर्व है, लेकिन गांव के बच्चों के लिए अच्छे स्कूल नहीं बना पाना चिंता की बात

नागपुर। देशभर में आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में अभिजीत दिपके ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने गांव पहुंचकर ध्वजारोहण किया। गांव की मिट्टी में तिरंगा फहराने का अवसर मिलने पर उन्होंने इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया। हालांकि, समारोह के दौरान गांव के सरकारी स्कूल की स्थिति ने उन्हें भावुक भी कर दिया।

ध्वजारोहण के बाद अभिजीत दिपके ने गांव के सरकारी स्कूल की स्थिति का जिक्र करते हुए शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “मेरे गांव आकर ध्वजारोहण करने का अवसर मिला, मुझे इस बात का बहुत गर्व है, लेकिन यहां के सरकारी स्कूल के हालात देखकर बहुत दुख होता है कि आजादी के 80 साल बाद भी हम अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल नहीं बना पा रहे हैं।”

तिरंगा फहराने के साथ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

अभिजीत दिपके का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने, देशभक्ति के गीत गाने और समारोह आयोजित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी देता है कि आजादी के इतने वर्षों बाद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव के बच्चों को भी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है। अगर सरकारी स्कूलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा।

“गांव के बच्चों का भविष्य भी उतना ही महत्वपूर्ण”

अभिजीत दिपके ने कहा कि शहरों में बच्चों को आधुनिक स्कूल, बेहतर शिक्षण सुविधाएं और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने पर काफी जोर दिया जाता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के कई सरकारी स्कूल अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गांव में रहने वाले बच्चों का भविष्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शहरों में रहने वाले बच्चों का। इसलिए सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आजादी का मतलब हर बच्चे तक पहुंचे अवसर

अभिजीत दिपके ने स्वतंत्रता दिवस के संदेश को शिक्षा से जोड़ते हुए कहा कि आजादी का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब समाज के हर वर्ग और हर गांव के बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल बड़ी इमारतों, सड़कों और आधुनिक शहरों से नहीं मापी जा सकती। देश की असली तरक्की तब होगी, जब गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर शिक्षा हासिल कर अपने सपनों को पूरा कर सके।

सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत

उन्होंने सरकारी स्कूलों में भवन, कक्षाओं, शिक्षण संसाधनों और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि ग्रामीण बच्चों के लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था तैयार करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में निवेश के समान है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अभिजीत दिपके का यह बयान सिर्फ एक स्कूल की स्थिति पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की व्यापक चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचता है। तिरंगा फहराने के गर्व के साथ सरकारी स्कूल की बदहाली पर व्यक्त की गई उनकी चिंता ने स्वतंत्रता दिवस के समारोह को शिक्षा और बच्चों के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे से जोड़ दिया।

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