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मायावती का सरकारों पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘हर हाथ को काम’ मिले, खाली पड़े लाखों सरकारी पदों पर तुरंत हो भर्ती

by Admin
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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और सरकारी नौकरियों में कमी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकारों से मांग की है कि देश के करोड़ों गरीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं और खासकर बेरोजगार परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

मायावती ने कहा कि बेरोजगारी आज देश के सामने मौजूद सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। ऐसे में सरकारों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने और युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए।

मायावती ने यूपी सरकार के कार्यकाल का किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान पुलिस और पंचायती राज विभाग सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए सरकारी पद सृजित किए गए थे।

उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान सरकारी नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक हटाकर सर्वसमाज के लोगों को सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए थे।

मायावती ने कहा कि सरकार में नहीं रहने के बाद भी वह लगातार देश में व्याप्त महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, खराब स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन, मजबूरी में पलायन, महिला असुरक्षा, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाती रही हैं।

बेरोजगार युवाओं के आंदोलन का भी जिक्र

मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, लंबे समय तक चले इस आंदोलन के कारण बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।

मायावती का कहना है कि शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और भविष्य को लेकर असुरक्षा को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकारों को युवाओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना होगा।

खाली पड़े लाखों पदों पर भर्ती की मांग

मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में रिक्त पदों की पहचान कर समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जानी चाहिए।

उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार को लेकर भी चिंता जताई। मायावती के मुताबिक, मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पेपर लीक, नकल, धांधली और भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त करना सरकार की जिम्मेदारी है।

‘एक परिवार में एक को भी नौकरी मिले तो बड़ा सहारा’

मायावती ने सरकारी नौकरी को केवल रोजगार का साधन नहीं बल्कि परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया।

उनका कहना है कि यदि किसी परिवार के एक सदस्य को भी स्थायी सरकारी नौकरी मिल जाती है तो इससे पूरे परिवार को आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है। बेरोजगारी से प्रभावित लाखों परिवारों के लिए सरकारी रोजगार बड़ा सहारा साबित हो सकता है।

SC, ST और OBC आरक्षण को लेकर भी उठाया सवाल

मायावती ने सरकारी नौकरियों को सामाजिक न्याय और आरक्षण के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम होने का असर SC, ST और OBC समाज पर भी पड़ता है।

उनका कहना है कि संविधान में दिए गए आरक्षण के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकारी विभागों में पर्याप्त भर्तियां होना जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि सरकारी पद ही लगातार कम होते जाएंगे या लंबे समय तक रिक्त रहेंगे तो आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र वर्गों तक पहुंचाने में भी समस्या पैदा होगी।

मायावती ने वंचित और पिछड़े वर्गों के लोगों को आर्थिक मजबूती तथा सम्मानजनक जीवन देने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

निजीकरण पर भी मायावती का निशाना

मायावती ने राष्ट्रीय संपत्तियों और सरकारी संस्थानों के निजीकरण को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारों को सरकारी क्षेत्र को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने सरकारों से मुनाफा कमाने की व्यापारिक सोच के बजाय संविधान की कल्याणकारी भावना के अनुरूप नीतियां लागू करने की अपील की।

मायावती के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं बल्कि आम जनता को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना भी होना चाहिए।

‘हर हाथ को काम’ को बनाया जाए राष्ट्रीय प्राथमिकता

मायावती ने कहा कि देश के युवाओं को रोजगार और प्रत्येक परिवार को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकारों को ठोस रोजगार नीति बनानी चाहिए।

उन्होंने ‘हर हाथ को काम’ को व्यापक जनहित से जोड़ते हुए कहा कि रोजगार की समस्या का समाधान होने से गरीबी, पलायन और आर्थिक असुरक्षा जैसी कई समस्याओं पर एक साथ प्रभाव पड़ सकता है।

संसद में जारी गतिरोध खत्म करने की भी अपील

मायावती ने संसद के मौजूदा सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर जारी गतिरोध को समाप्त करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और जनहित के मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है।

उनका कहना है कि सरकार और विपक्ष के बीच किसी भी मुद्दे पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संसद की कार्यवाही लंबे समय तक बाधित रहना उचित नहीं है। महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर पर्याप्त बहस और चर्चा होनी चाहिए।

मायावती ने कहा कि संसद में बेरोजगारी, पेपर लीक, युवाओं के भविष्य, महंगाई, गरीबी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, ताकि इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस नीति बनाई जा सके।

सरकारों से मायावती की अपील

मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे बेरोजगारी और रोजगार के संकट को गंभीरता से लें। उन्होंने सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती, भर्ती परीक्षाओं को पेपर लीक और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने, आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया।

मायावती का कहना है कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति तभी संभव है, जब गरीब, श्रमिक, युवा, महिला और वंचित वर्ग सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके लिए सरकारों को ‘हर हाथ को काम’ के लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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