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हिंदू धर्म में घर वापसी पर वसीम रिजवी को पछतावा-यादव जी ने दिया करारा जवाब

by Admin
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वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी इस वक्त डिप्रेशन में हैं। उन्होंने खुद एक वीडियो के जरिए इस बात की जानकारी दी है। इस वीडियो में वह खुदकुशी के बारे में बात करते हुए भी नजर आए हैं। कुछ समय पहले ही वह धर्मांतरण कर वसीम रिजवी से जितेंद्र त्यागी बने थे, लेकिन अब उनका कहना है कि उन्हें सनातन धर्म में वो प्यार और मोहब्बत नहीं मिली है, जैसी किसी पुराने रिश्तेदार को घर वापसी पर मिलती है।

उन्होंने कहा, “जो कदम हमने उठाया है वो बहुत सोच-समझकर उठाया है। बहुत से लोगों ने मुझसे फोन पर यह बात की कि सनातन धर्म में जाकर आपको क्या मिला। मैं समझता हूं कि उस वक्त आतंकी गतिविधियों और इस्लामिक जिहाद से और इस्लाम में बच्चों को दी जा रही कट्टरपंथी शिक्षा और इस्लामिक क्रूरता से मैं परेशान था।”

जितेंद्र त्यागी ने आगे कहा कि वह बहुत डिप्रेशन में हैं और उनकी जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि दुश्मनों से मरने से बेहतर मैं ये फैसला करूं कि मैं अपने जीवन को खुद समाप्त कर लूं.

वसीम रिजवी के इस बयान पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण यादव जी ने टिपण्णी की है. उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है वसीम रिजवी साहब! यूं ही भारत रत्न,बोधिसत्व बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर जी नहीं कहे थे कि “सनातन धर्म छोड़ा जा सकता है लेकिन सुधारा नहीं जा सकता है।”

बाबा साहब डॉ अम्बेडकर चाहते थे कि उन्हें संस्कृत पढ़ाया जाय, पर भारत मे कोई पढ़ाने को तैयार नहीं हुवा, वे चाहते थे कि उन्हें पानी पीने का अधिकार मिले जिस हेतु वे महाड तालाब आंदोलन किये जिसमें उन्हें व उनके साथियों पर डंडे बरसाये गए,वे चाहते थे कि उन्हें मंदिर प्रवेश मिले पर उनको व उनकी पत्नी रमा बाई जी को पंढरपुर मंदिर से अपमानित कर भगा दिया गया,वे चाहते थे कि उन्हें समता मिले लेकिन मदनमोहन मालवीय जी ने विदेश में अंग्रेजो के सामने ही छुवाछूत का प्रदर्शन किया।

आजादी के बाद बहैसियत कानून मंत्री वे चाहते थे कि हिन्दू स्त्रियों को अधिकार मिले लेकिन उन्हें असफल होने के बाद मंत्री पद त्यागना पड़ा। वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी जी भारतीय संविधान में आर्टिकल 17 जातिगत भेदभाव को निषिद्ध करता है बावजूद इसके पूरे देश भर में नित्य जातिगत भेदभाव,अपमान होता रहता है।राजस्थान में मटके से पानी पीने को लेकर इंद्र मेघवाल नामक बच्चे की अभी कुछ ही दिन पूर्व हत्या हो गयी है।

वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी जी!सोचिए जब पीढ़ीगत हिन्दू होने पर ऐसा बर्ताव है इस देश व समाज में तो आप तो जुमा-जुमा कुछ ही दिन पूर्व वसीम रिजवी से जितेंद्र त्यागी बने हैं,आपको कौन पूछता है जब पीढ़ीगत हिंदुओ की यह दशा है? वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी जी!आपके पुरखे कोई मूर्ख थोड़े ही रहे होंगे जिन्होंने इस्लाम धर्म ग्रहण किया होगा।वे बहुत सोच-समझकर धर्मांतरण किये होंगे जैसे बाबा साहब अम्बेडकर ने यह कहते हुये 14 अक्टूबर 1956 को धर्मांतरण कर लिया कि इसे त्यागा जा सकता पर सुधारा नहीं जा सकता है।

वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी जी! कुछ ही दिनों में आत्महत्या करने को जी करने लगा?तब तो जी मिचला रहा था जल्दी घर वापसी को और अब कुछ ही दिन में बात सम्मान न मिलने व खुदकुशी की आ गयी? वसीम रिजवी से जितेंद्र त्यागी बने त्यागी जी! थोड़ा त्याग करिए और सनातन धर्म का फल चखिये जिसे पीढ़ियों पूर्व आपके पुरखे छोड़कर चले गए थे।खुदकुशी की शीघ्रता न करिए।घर वापसी का फल भोग लीजिए,पता नहीं अगला जन्म क्या और कैसा होगा?

-चन्द्रभूषण सिंह यादव

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2 comments

डॉ अनिल कुमार मिश्र September 5, 2022 - 8:56 am

पलायन किसी समस्या का हल नहीं है। समस्या को दूर करने के ऊपाय करने होंगे। श्री यादव जी की व्यंग्यात्मक शैली पढनें में अच्छी लग सकती है पर व्यावहारिक नहीं है।
सोचिये इसी भारत वर्ष में जहां धर्म और जाति आधारित भेद इतनी गहरी जड़ें जमा चुका हो उसी भारत में अब सब लोग होटलों में बिना यह जाने कि भोजन किसने पकाया है, अथवा उन्हीं बरतनों में सभी खा पी रहे हैं, यह परिवर्तन का आरम्भ है।
सदियों से चली आ रही मान्यतायें ध्वस्त होंगी और भारत अवश्य एक न एक दिन समुन्नत रध्तृ बनेगा।
श्री जितेन्द्र त्यागी जी कुछ पाने की लालसा छिड़ कर समाज को सुधारने के कार्य में संलग्न हो जाइये। फिर आप को अवसाद कभी नहीं होगा।
आशीर्वाद

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अनिल कुमार मिश्र September 5, 2022 - 8:58 am

राष्ट्र, छोड़
वर्तनी की अशुद्धियों को ठीक कर के पढ़े ।
धन्यवाद

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