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सुप्रीम कोर्ट में छिड़ी थी सोनम वांगचुक की हिरासत पर कानूनी जंग

by Admin
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सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरू हुई. जस्टिस अरविंद कुमार और पी.बी. वराले की बेंच इस मामले को देख रही है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तबीयत अचानक बिगड़ने से कार्यवाही प्रभावित हुई. वांगचुक को लद्दाख में राज्य के दर्जे की मांग और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से हिरासत में लिया गया था.

नई दिल्ली: लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज उस वक्त नाटकीय स्थिति पैदा हो गई जब केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता की तबीयत अचानक बिगड़ गई. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच के सामने मामले की दलीलें शुरू ही हुई थीं कि सॉलिसिटर जनरल ने असहजता महसूस की जिसके बाद कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा. वांगचुक को लद्दाख में राज्य के दर्जे की मांग और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिसे लेकर शीर्ष अदालत में तीखी बहस की उम्मीद थी.

पूर्ण राज्य की मांग
पेश मामले में एक तरफ जहां सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से सबसे मजबूत कानूनी पैरवी करने वाले एसजी तुषार मेहता की अनुपलब्धता या खराब स्वास्थ्य सुनवाई की दिशा और समय सीमा को प्रभावित कर सकता है. लद्दाख का मुद्दा पहले से ही केंद्र सरकार के लिए एक जटिल चुनौती बना हुआ है, जहां अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य की मांग को लेकर असंतोष है.

छह महीने पहले गिरफ्तारी
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा दिलाने के लिए सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे. 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा भड़कने और 4 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने उनपर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया. 26 सितंबर 2025 को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया.

कानूनी लड़ाई और वर्तमान स्थिति
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी रिहाई के लिए याचिका दायर की. याचिका में तर्क दिया गया कि वांगचुक ने हमेशा शांति की अपील की है और सरकार चुनिंदा वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल कर उन्हें फंसा रही है. कोर्ट ने हाल ही में उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताई है और अब मामला साक्ष्यों की जांच और हिरासत की वैधता पर टिका है.

सोनम वांगचुक की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी: पत्नी

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत से रिहा होने के बाद आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाएंगे , बल्कि लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में चर्चा और संवाद के माध्यम से अपना योगदान जारी रखेंगे, यह बात उनकी पत्नी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (एचआईएएल) की सह-संस्थापक गीतांजलि जे. आंगमो ने कही।

उन्होंने कहा कि उनके पति की कोई “राजनीतिक महत्वाकांक्षा” नहीं थी और उन्होंने लद्दाख के नेताओं के आग्रह पर जून 2025 में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली उच्च-स्तरीय समिति के सदस्य बनने पर सहमति जताई थी।

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