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दलित छात्र की मौत ; IIT-Bombay पर सवाल: परिवार के आरोपों के बाद SC/ST Act में केस, जांच क्राइम ब्रांच के हवाले

by Admin
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मुंबई: देश के प्रतिष्ठित IIT-Bombay में 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद मामला अब सिर्फ एक छात्र की व्यक्तिगत त्रासदी तक सीमित नहीं रह गया है। परिवार की शिकायत में जातिगत टिप्पणियों, मानसिक उत्पीड़न और दबाव के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। अब मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से था और IIT-Bombay के Energy Science and Engineering विभाग में दूसरे वर्ष का छात्र था। उसकी मौत के बाद परिवार ने सवाल उठाया है कि संस्थान के भीतर उसके साथ पिछले कुछ महीनों में कथित तौर पर कैसा व्यवहार किया गया और क्या उसकी शिकायतों या परेशानियों को गंभीरता से लिया गया।

परिवार का आरोप—तीन महीने से झेल रहा था कथित जातिगत उत्पीड़न

साहिल के पिता रविंद्र वाकड़े ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके बेटे को करीब तीन महीने से कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था।

शिकायत में प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला का नाम है। पिता का आरोप है कि उनके बेटे ने उन्हें कथित जातिगत दुर्व्यवहार और धमकी के बारे में बताया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इन्हीं आरोपों की जांच अब पुलिस कर रही है।

यही वह बिंदु है जिसने मामले को महज परीक्षा में अनुशासन के विवाद से आगे बढ़ाकर जातिगत समानता, छात्र अधिकार और संस्थागत जवाबदेही के सवाल से जोड़ दिया है। इस मामले में अब कई लोगों ने सवाल उठाये, IIT-Bombay में सुसाईड का ये तीसरा मामला है.

परीक्षा में मोबाइल मिलने की घटना के बाद क्या हुआ?

रिपोर्टों के अनुसार, 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन पाया गया। IIT-Bombay का कहना है कि उसने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी।

संस्थान का दावा है कि उसके खिलाफ तत्काल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई। IIT-Bombay के अनुसार, शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने उससे बातचीत की, उसे समझाया और बताया कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

लेकिन दूसरी ओर, प्रदर्शन कर रहे छात्रों और परिवार की ओर से संस्थान के इस विवरण पर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि साहिल को निलंबन की धमकी दी गई थी। इस विरोधाभास की जांच अब पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल है।

सवाल सिर्फ ‘परीक्षा में गलती’ का नहीं

किसी परीक्षा में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं—यह एक अलग कानूनी और संस्थागत विषय है। लेकिन यदि परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो सवाल यह भी होगा कि क्या एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान अपने दलित छात्रों को जातिगत भेदभाव से सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था कर रहा था?

क्या किसी छात्र द्वारा कथित भेदभाव की शिकायत करने पर स्वतंत्र और प्रभावी शिकायत-निवारण व्यवस्था सक्रिय होती है?

क्या शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है?

और सबसे अहम—क्या सामाजिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को संस्थान के भीतर ऐसा माहौल मिलता है, जहां वे बिना डर अपनी बात रख सकें?

ये सवाल अब सिर्फ साहिल के परिवार के नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल बन चुके हैं।

SC/ST Act में FIR, क्राइम ब्रांच के हाथ में जांच

पुलिस ने परिवार की शिकायत के आधार पर SC/ST Act की धाराएं लगाई हैं। FIR में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित BNS की धारा भी शामिल है। मामले को अब मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।

इस जांच में परिवार के आरोपों के साथ-साथ IIT-Bombay का आधिकारिक पक्ष, परीक्षा के दौरान और उसके बाद हुई घटनाएं, संबंधित शिक्षकों एवं अधिकारियों की भूमिका और उपलब्ध रिकॉर्ड की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

IIT-Bombay ने आरोपों से किया इनकार

IIT-Bombay के निदेशक शिरीष केदारे ने संस्थान में जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि छात्रों की जाति से संबंधित जानकारी सामान्य प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध नहीं रहती और इस मामले में भी जातिगत भेदभाव नहीं हुआ। संस्थान ने पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही है।

परिवार ने उठाई जवाबदेही की मांग

साहिल के माता-पिता ने पुलिस के सामने कार्रवाई की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपने बेटे का शव लेने से भी कई घंटे तक इनकार किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तथा क्राइम ब्रांच से जांच की मांग की। बाद में पुलिस द्वारा क्राइम ब्रांच जांच की बात स्वीकार किए जाने के बाद परिवार ने शव लिया।

साहिल की मौत ने IIT-Bombay परिसर में छात्रों के विरोध को भी जन्म दिया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।

अब असली कसौटी जांच की निष्पक्षता

साहिल की मौत के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि न तो परिवार के आरोपों को बिना जांच के अंतिम सत्य माना जा सकता है और न ही उन्हें केवल ‘परीक्षा विवाद’ कहकर नजरअंदाज किया जा सकता है।

क्राइम ब्रांच की जांच को यह स्पष्ट करना होगा कि साहिल के साथ वास्तव में क्या हुआ, उसके द्वारा परिवार को बताई गई कथित जातिगत प्रताड़ना की क्या सच्चाई है, परीक्षा वाली घटना के बाद उसके साथ किस तरह का व्यवहार हुआ और क्या किसी व्यक्ति या संस्थागत प्रक्रिया की भूमिका उसकी मौत से जुड़ती है।

क्योंकि अगर किसी छात्र ने जाति के कारण भेदभाव या उत्पीड़न झेला है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी का नहीं रहता—सवाल उस पूरी संस्थागत व्यवस्था की जवाबदेही का भी होता है, जिसे हर छात्र को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण देने की जिम्मेदारी है।

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