Home » “मृतक वोटरों को ज़िंदा लाएंगी ममता! कोलकाता में धरना, चुनाव आयोग पर ‘फर्जी मौत’ का आरोप”

“मृतक वोटरों को ज़िंदा लाएंगी ममता! कोलकाता में धरना, चुनाव आयोग पर ‘फर्जी मौत’ का आरोप”

by aman
0 comments 45 views

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में भारतीय चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने जिन मतदाताओं को ‘मृत’ घोषित कर दिया है, वह उन्हें जीवित सामने लाएंगी। यह विरोध प्रदर्शन आयोग के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें कुछ मतदाताओं को मृत मानकर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

मुख्यमंत्री बनर्जी बुधवार शाम को कोलकाता के धर्मतला में एक धरने पर बैठ गईं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने के अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उन मतदाताओं के नामों को हटाने पर आपत्ति जताई, जिन्हें आयोग ने मृत घोषित कर दिया है। ममता बनर्जी ने चुनौती दी है कि अगर ये लोग वास्तव में मृत हैं, तो आयोग बताए कि उन्होंने किन नामों को हटाया है, और यदि वे जीवित हैं, तो आयोग अपने फैसले के लिए माफी मांगे। कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर शुरू हुए इस विरोध के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि BJP और चुनाव आयोग बंगाली मतदाताओं को वोट देने से रोकने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस साजिश को बेनकाब करेंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह तब तक धरने पर बैठी रहेंगी जब तक कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण नहीं देता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का आश्वासन नहीं देता। उनके धरने में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। यह धरना दोपहर करीब 2:15 बजे शुरू हुआ। प्रदर्शन राज्य में चुनाव आयोग के पूरे दल के प्रस्तावित दौरे से दो दिन पहले हो रहा है। इसकी घोषणा पहले TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने की थी।

यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहाँ राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हैं। ममता बनर्जी का यह कदम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाता है और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है। 28 फरवरी को चुनाव आयोग ने पोस्ट-SIR के बाद संशोधित वोटर लिस्ट जारी की थी। इसके बाद सत्तारूढ़ TMC और चुनाव आयोग के बीच टकराव तेज हो गया है।

चुनाव आयोग पर TMC के आरोप…

  • चुनाव आयोग वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) राजनीतिक मकसद से कर रहा है।
  • हटाए गए नामों में अल्पसंख्यक समुदाय, प्रवासी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग ज्यादा हैं।
  • वोटर लिस्ट से एक करोड़ से ज्यादा नाम हटाने का लक्ष्य प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही तय कर लिया गया था।
  • SIR के बाद 63.66 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए
  • 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से करीब 63.66 लाख नाम यानी कुल मतदाताओं के लगभग 8.3% नाम सूची से हटाए गए हैं।
  • इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है।
  • इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि उनकी पात्रता आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के बाद तय की जाएगी। इससे कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

You may also like

Leave a Comment